द फॉलोअप, रांची
झारखंड के महाधिवक्ता राजीव रंजन के इस्तीफे को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने हेमंत सरकार पर तीखा हमला बोला है। भाजपा प्रदेश प्रवक्ता अजय साह ने कहा कि राज्य में शासन नहीं, बल्कि “म्यूजिकल चेयर” का खेल चल रहा है, जहां किसी भी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति का भविष्य सुरक्षित नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार में फैसले योग्यता और प्रदर्शन के आधार पर नहीं, बल्कि सत्ता के भीतर चल रहे राजनीतिक समीकरणों के अनुसार लिए जा रहे हैं। अजय साह ने कहा कि राजीव रंजन ने स्वेच्छा से इस्तीफा दिया है या उन पर दबाव बनाकर इस्तीफा दिलवाया गया है, यह सरकार भले ही स्पष्ट न करे, लेकिन जनता पूरे घटनाक्रम को समझ रही है। उन्होंने कहा कि पहले विनय चौबे, फिर अनुराग गुप्ता और अब राजीव रंजन का मामला सामने आया है, जो सरकार की कार्यशैली को उजागर करता है। भाजपा का आरोप है कि संवैधानिक और महत्वपूर्ण पदों पर बैठे लोगों को अस्थिरता का सामना करना पड़ रहा है।

अदालतों में सरकार की हुई किरकिरी : भाजपा
भाजपा प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि राजीव रंजन के कार्यकाल में राज्य सरकार को अदालतों में कई बार शर्मिंदगी झेलनी पड़ी। उन्होंने कहा कि कई मामलों में सरकार की कानूनी स्थिति कमजोर होने के बावजूद राजनीतिक कारणों से उन्हें सर्वोच्च न्यायालय तक ले जाया गया। इससे न केवल सरकारी धन की बर्बादी हुई, बल्कि सरकार की बार-बार किरकिरी भी हुई। उन्होंने कहा कि महाधिवक्ता का कार्यालय सरकार का प्रभावी पक्ष न्यायालय में रखने और कानूनी रणनीति तैयार करने के लिए होता है, लेकिन यह कार्यालय राजनीतिक एजेंडे का माध्यम बनकर रह गया। गंभीर कानूनी मामलों को भी राजनीतिक दृष्टिकोण से देखा गया, जिसका नुकसान राज्य को उठाना पड़ा।

श्वेत पत्र जारी करने की मांग
भाजपा ने राजीव रंजन के पूरे कार्यकाल पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग की है। पार्टी ने कहा कि सरकार सार्वजनिक करे कि उनके कार्यकाल में राज्य सरकार ने कितने मुकदमे जीते और हारे, बाहरी वकीलों एवं कानूनी सलाहकारों पर कितना खर्च हुआ तथा उससे राज्य को क्या लाभ मिला। भाजपा ने यह भी सवाल उठाया कि यदि महाधिवक्ता का कार्यकाल संतोषजनक था तो उनका इस्तीफा क्यों हुआ और यदि संतोषजनक नहीं था तो उन्हें इतने लंबे समय तक पद पर क्यों बनाए रखा गया। पार्टी का कहना है कि झारखंड की जनता जानना चाहती है कि आखिर इस “म्यूजिकल चेयर” के खेल में राजीव रंजन को पद छोड़ने की नौबत क्यों आई। भाजपा ने सरकार से पूरे मामले पर चुप्पी तोड़ने और सच्चाई जनता के सामने रखने की मांग की है।
