द फॉलोअप डेस्क, रांचीः
अरबों रुपये खर्च करने के बाद भी राजधानी रांची में हवा का एक झोंका बिजली आपूर्ति को ठप कर देता है। मुहल्लों में बिजली आपूर्ती घंटो तक बाधित हो जाती है, बिजली के पोल और तार सड़क पर गिर जाते हैं। कई इलाके और मुहल्लों में अंधेरा छा जाता है। 23 सितंबर से हो रही बारिश और तेज हवाओं का असर राजधानी रांची और पूरे झारखंड में दिखाई दे रहा है। राजधानी रांची के कई इलाकों में पेड़ गिरने, बिजली के पोल क्षतिग्रस्त होने और बिजली लाइनों में फॉल्ट आने के कारण लोगों को लंबे समय तक बिजली कटौती का सामना करना पड़ा है। घंटों बाद बिजली आपूर्ति चालू नहीं होसकी है। बारिश की मार ने बिजली वितरण निगम के उस दावे को खोखला साबित कर दिया है, जिसमें 24 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति का सुनहरा सपना दिखाया जाता था।
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इस परेशानी से निजात दिलाने के लिए सात साल पहले रांची में अंडरग्राउंड केबलिंग की नींव रखी गई थी। करीब 450 करोड़ रुपये की इस महत्वाकांक्षी परियोजना का उद्देश्य तारों के जंजाल से शहर को मुक्ति दिलाना था। लेकिन आज भी यह काम अधूरा है। आज भी शहर के बड़े हिस्से में खुले तार और जर्जर बुनियादी ढांचा जस का तस खड़े हैं। हर साल रिपेयर और मेंटेनेंस के नाम पर 300 से 400 करोड़ खर्च किए जाते हैं। इसके बावजूद कोई खास करिशमा देखने को नहीं मिलता। बिजली कटने पर फोन करो तो कहा जाएगा कि सुरक्षा कारणों से और पेड़ों की डालियां गिरने से बिजली काटी गई है। हर साल करोड़ों रुपये मेंटेनेंस पर खर्च होते हैं, पर ज़रा सी हवा और बारिश में पूरा सिस्टम हांफने लगता है। एक तरफ आम आदमी बिजली कटने से परेशान है तो दूसरी तरफ बिजली विभाग के अधिकारी एसी कमरों में बैठकर हर दिन बैठकें करते रहते हैं। इन बैठकों से पावर स्टेशनों पर लोड कंट्रोल करने और बिजली स्टोर करने के बड़े-बड़े दावे तो किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर नतीजा पूरी तरह फेल रहता है।

इसका खामियाजा सीधे तौर पर आम उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ रहा है। फिलाहल बिजली विभाग की टीमें प्रभावित इलाकों में आपूर्ति बहाल करने के लिए काम कर रही हैं। बिजली आपूर्ति पर सबसे ज्यादा असर पेड़ों के बिजली तारों पर गिरने और पोल टूटने से पड़ा है। विभाग के अनुसार लगातार बारिश और तेज हवा के कारण कुछ इलाकों में विद्युत संरचना को नुकसान पहुंचा, जिसके बाद मरम्मत और बहाली का काम शुरू किया गया। 26 सितंबर को भी बारिश या गरज के साथ बौछारों की संभावना जताई गई है, जबकि कुछ स्थानों पर तेज हवा और वज्रपात की चेतावनी भी है। ऐसे में बिजली उपभोक्ताओं के लिए अगले कुछ दिन महत्वपूर्ण रहेंगे। यह सब स्थिती तब है जब गर्मी का मौसम शुरु होने से पहले ही बिजली विररण निगम लिमिटेड आने वाले तूफान और वर्षा को लेकर अपनी तैयारी पूरी कर लेने का दावा करता है। प्रतिवर्ष इस पर राज्य में अरबों रुपये खर्च भी किए जाते हैं।
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