द फॉलोअप डेस्क
गुमला जिले में भरदा से छत्तीसगढ़ बॉर्डर तक लगभग 32 किलोमीटर लंबी एनएच-43 बाइपास सड़क का निर्माण कार्य जारी है। इस परियोजना के लिए किसानों की जमीन का अधिग्रहण किया गया है, लेकिन मुआवजा वितरण में गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आ रहे हैं। घटगांव पंचायत अंतर्गत जौरागढ़ गांव निवासी लाखों भगत ने बताया कि उनकी लगभग 61 डिसमिल जमीन सड़क निर्माण में अधिग्रहित की गई है, जिसका मुआवजा 46 लाख रुपये से अधिक बनता है। आरोप है कि यह मुआवजा उन्हें न देकर उनके ही परिवार के अन्य सदस्यों को दे दिया गया है। मुआवजा पाने के लिए लाखों भगत और उनके बच्चे लगातार प्रयास कर रहे हैं और भू-अर्जन विभाग व एनएचएआई के दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें न्याय नहीं मिल पाया है। इस मामले ने एनएचएआई और भू-अर्जन विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। किसान अपनी रोजी-रोटी की जमीन राष्ट्रहित में सड़क निर्माण के लिए दे रहे हैं, लेकिन उन्हें समय पर और सही मुआवजा नहीं मिल पा रहा है। इससे पहले भी एनएचएआई पर मुआवजा वितरण में अनियमितताओं के आरोप लगते रहे हैं।
लाखों भगत के बेटे बुद्धेश्वर भगत, जो दूसरे राज्य में काम करते थे, पारिवारिक जमीन विवाद सुलझाने के लिए वापस लौट आए हैं। बावजूद इसके, कई अधिकारियों और विभागों के चक्कर लगाने के बाद भी उन्हें कोई समाधान नहीं मिल सका है। किसान यह समझने में असमर्थ हैं कि जब उनकी जमीन देश के विकास के नाम पर ले ली गई है, तो मुआवजा उन्हें कब और कैसे मिलेगा। इसको लेकर अब भी संशय बना हुआ है। यदि गहराई से जांच की जाए, तो ऐसे कई अन्य मामले भी सामने आ सकते हैं।
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