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पहला मानसून नहीं झेल सकी पुलिया, जान जोखिम में डालकर आवागमन कर रहे डूमरझारा के लोग

पहला मानसून नहीं झेल सकी पुलिया, जान जोखिम में डालकर आवागमन कर रहे डूमरझारा के लोग

गिरिडीह:

गिरिडीह के डूमरझारा गांव में निर्माणाधीन सड़क पर बनी पुलिया पहला मानसून नहीं झेल पाई। पुलिया कुछ ही महीनों में क्षतिग्रस्त हो गई और अब ग्रामीण जान जोखिम में डालकर आवागमन को मजबूर हैं। ग्रामीणों ने कहा कि 4 महीने पहले बनी पुलिया पहला मानसून ही नहीं झेल पाई और करीब 1 महीने पहले धंस गई। पुलिया का अधिकांश हिस्सा टूटकर 20 फीट गहरी खाई में जा गिरा। डूमरझारा को बरमसिया से जोड़ने वाली इस सड़क से रोजाना दर्जनों लोग सफर करते हैं। पुलिया टूटने के बाद यहां मिट्टी डालकर संकरा रास्ता तैयार किया गया है, जिसके एक ओर तालाब है तो दूसरी ओर खाई। जोखिम भरा यह संकरा रास्ता ही फिलहाल ग्रामीणों के आवागमन का एकमात्र जरिया है। 

ग्रामीणों ने निर्माण की गुणवत्ता पर उठाए सवाल
ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिया के निर्माण में गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा गया, जिसके कारण निर्माण के कुछ ही समय बाद पुलिया धंस गई। ग्रामीणों का कहना है कि यदि निर्माण कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप किया गया होता, तो पहली बारिश के बाद ही पुलिया की यह स्थिति नहीं होती। ग्रामीणों के मुताबिक सड़क और पुलिया का निर्माण स्थानीय निवासी मोती साव द्वारा कराया गया है। हालांकि, निर्माण कार्य से जुड़े संवेदक रामचंद्र यादव ने बताया कि उन्हें पुलिया क्षतिग्रस्त होने की जानकारी मिली है। उन्होंने कहा कि उक्त काम पेटी ठेकेदार को दिया गया था और पुलिया का दोबारा निर्माण कराया जाएगा।

विभाग बोला- जांच के बाद होगी कार्रवाई
मामले में संबंधित विभाग के जीई ने कहा कि यदि निर्माण के बाद पुलिया क्षतिग्रस्त हुई है, तो इसकी जांच कराई जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि विभाग की ओर से संवेदक को अभी भुगतान नहीं किया गया है।

पुलिया धंसने की तकनीकी जांच की मांग
सवाल उठना लाजिमी है कि जब पुलिया का निर्माण कुछ महीने पहले ही हुआ था और उसका बड़ा हिस्सा 20 फीट नीचे जा चुका है, तो निर्माण की गुणवत्ता की जांच कब होगी? वहीं, जब तक पुलिया का दोबारा निर्माण नहीं हो जाता, तब तक इस जोखिम भरे रास्ते से गुजरने वाले ग्रामीणों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी होगी? ग्रामीणों ने पूरे मामले की तकनीकी जांच कराने, निर्माण की गुणवत्ता की जांच करने और पुलिया का सुरक्षित एवं मानक के अनुरूप दोबारा निर्माण कराने की मांग की है।

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