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BSL : विस्थापित 19 गांवों को मिला कर छह पंचायत बने, इसकी तकनीकी अड़चनें दूर करेगी सरकार

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द फॉलोअप डेस्क
सेल के बोकारो स्टील प्लांट के निर्माण से विस्थापित हुए 19 गावों को मिला कर छह पंचायत बनाने की मांग पर आज विधानसभा में माले विधायक अरूप चटर्टी, कांग्रेस विधायक श्वेता सिंह और झामुमो विधायक उमाशंकर रजक ने सरकार को जम कर घेरा। अरुप चटर्जी ने अपने मूल सवाल में बताया कि बीएसएल के निर्माण के बाद विस्थापित गावों को मिला कर वहां पूर्व में 15 पंचायतों का गठन किया जा चुका है। लेकिन अभी भी 19 गांव ऐसे हैं जिसके नागरिकों को बीएसएल कोई सुविधा प्रदान नहीं कर रहा। दूसरी ओर राज्य सरकार के दायरे में नहीं होने के कारण उन गावों के लोगों को सरकारी सुविधाओं का लाभ नहीं मिल रहा। उनके बच्चों को सर्टिफिकेट बनाने, प्रधानमंत्री आवास, राशन या अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा है। इसलिए पंचायती राज विभाग अविलंब छह पंचायतों का गठन करे। उन्होंने बताया कि पूर्व में निर्मित पंचायतों को लेकर बीएसएल कोर्ट भी गया था। लेकिन कोर्ट ने पंचायतों के गठन पर कोई रोक नहीं लगायी। वहीं विभागीय मंत्री दीपिका पांडेय सिंह का कहना था कि जिस क्षेत्र को पंचायत बनाने की मांग की जा रही है, वह बीएसएल के लिए अधिग्रहित भूमि है। इस मुद्दे पर वहां के डीसी और बीएसएल प्रबंधन के साथ बैठक हुई है। राज्य सरकार उस क्षेत्र की जमीन को बीएसएल से वापस लेने की कोशिश कर रही है। जमीन की वापसी के साथ वहां पंचायतों का निर्माण कर दिया जाएगा।


कांग्रेस विधायक श्वेता सिंह का भी कहना था कि जिन छह पंचायतों के गठन की मांग की जा रही है, उस क्षेत्र में लगभग 60-70 हजार लोग बसते हैं। वे चाहते हैं कि उन्हें पंचायती राज व्यवस्था का लाभ मिले। उन्होंने यह भी कहा कि जिस तरह पूर्व में राज्य सरकार ने पंचायतों का निर्माण किया, उसी तरह फिर छह नये पंचायतों का गठन करे। उन्होंने कहा कि बीएसएल से जमीन वापसी की प्रक्रिया बहुत दुरुह है। इसमें उलझने पर पंचायतों के गठन का मार्ग अवरुद्ध हो जाएगा। इसलिए राज्य सरकार ने जिस तरह पूर्व में 15 पंचायतों का निर्माण किया, उसी तरह छह नये पंचायतों का भी गठन करे। इसके लिए पंचायती राज विभाग को अधिकार प्राप्त है।

झामुमो विधायक उमाकांत रजक का भी तर्क था कि रितुडीह पंचायत का निर्माण हुआ। वहां अधिकतर अनाधिकृत लोग रहते हैं। जबकि सही मायने में विस्थापितों को उनका हक नहीं मिल रहा। कांग्रेस, माले और झामुमो विधायकों की इस मांग के प्रति एकजुटता और जनता की समस्याओं को समझते हुए मंत्री दीपिका पांडेय सिंह अंततः पंचायत निर्माण का रास्ता निकालने को सहमत हुई। उन्होंने आश्वस्त किया कि जल्द ही इस मुद्दे पर वह वहां के उपायुक्त और संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक करेंगी। राह निकालेंगी। क्योंकि उस क्षेत्र में रहनेवाले लोगों की समस्या से वह भी वाकिफ हैं।


 

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