द फॉलोअप डेस्क
झारखंड में भाषा विवाद को लेकर महागठबंधन के भीतर सहमति नहीं बन पाई है। सूत्रों के अनुसार भोजपुरी, मगही और अंगिका भाषाओं को क्षेत्रीय भाषा सूची में शामिल करने के मुद्दे पर एक ओर कांग्रेस और राजद अपनी राय पर कायम हैं, जबकि दूसरी ओर झामुमो ने अलग रुख अपनाया है। इस मुद्दे पर गठबंधन के भीतर मंथन जारी है, लेकिन अब तक कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं निकल सका है। जानकारी के मुताबिक कांग्रेस और राजद इन भाषाओं को शामिल करने के पक्ष में नजर आ रहे हैं, जबकि झामुमो की ओर से इस पर सावधानीपूर्वक विचार करने की बात कही जा रही है। भाषा पहचान और स्थानीय अस्मिता से जुड़े इस मुद्दे ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है।
सुदिव्य सोनू ने कमेटी में नए सदस्यों की मांग उठाई
इस बीच मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने भाषा समिति में अल्पसंख्यक और जनजातीय मंत्री को भी शामिल करने की मांग की है। उनका कहना है कि भाषा और सांस्कृतिक पहचान से जुड़े मसलों पर व्यापक प्रतिनिधित्व जरूरी है, ताकि सभी वर्गों की राय को महत्व मिल सके। भाषा विवाद पर अब अंतिम फैसला मुख्यमंत्री के स्तर पर होने की संभावना है। सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सभी पक्षों की राय लेने के बाद इस मामले में अंतिम निर्णय कर सकते हैं। ऐसे में अब सबकी नजर मुख्यमंत्री के फैसले पर टिकी हुई है।