द फॉलोअप, रांची:
69वें राष्ट्रमंडल संसदीय संघ (CPA) सम्मेलन में झारखंड विधानसभा के अध्यक्ष रबींद्र नाथ महतो ने दिव्यांगजनों की लोकतांत्रिक भागीदारी और संसदों को सभी के लिए सुलभ बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। सम्मेलन का आयोजन 13 से 19 सितंबर 2026 तक केप टाउन, दक्षिण अफ्रीका में किया जा रहा है। झारखंड राष्ट्रमंडल संसदीय संघ शाखा की ओर से अध्यक्ष रवीन्द्रनाथ महतो डेलीगेट के रूप में सम्मेलन में भाग ले रहे हैं। वहीं, मथुरा प्रसाद महतो एवं दशरथ गागराई ऑब्जर्वर के रूप में सम्मेलन में शामिल हैं। रवीन्द्रनाथ महतो ने सम्मेलन के वर्कशॉप में Accessible Parliaments: Inclusion for People with Disabilities विषय पर अपने विचार रखते हुए कहा कि दिव्यांगजन लोकतंत्र में केवल लाभार्थी या अतिथि नहीं हैं। वे नागरिक, मतदाता, प्रतिनिधि, नेता और निर्णयकर्ता हैं। जब संसद और लोकतांत्रिक संस्थाएं सभी के लिए सुलभ होती हैं, तो लोकतंत्र और अधिक मजबूत होता है।

भारत के प्रयासों को किया रेखांकित
अपने वक्तव्य में महतो ने भारत में दिव्यांग नागरिकों के लिए किए जा रहे विभिन्न प्रयासों की जानकारी अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों के सामने रखी। उन्होंने बताया कि दिव्यांगजनों की पहचान और सरकारी योजनाओं के लाभ तक पहुंच आसान बनाने के लिए यूनिक डिसएबिलिटी आईडी (UDID) प्रणाली लागू की गई है। उनके अनुसार, मार्च 2026 तक 1.34 करोड़ से अधिक विशिष्ट दिव्यांगता पहचान पत्र जारी किए जा चुके थे। उन्होंने सुगम्य भारत अभियान के माध्यम से भौतिक और संस्थागत बाधाओं को कम करने के प्रयासों का भी उल्लेख किया। साथ ही चुनावी प्रक्रिया में दिव्यांग मतदाताओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए घर से मतदान, व्हीलचेयर, परिवहन और स्वयंसेवक सहायता जैसी सुविधाओं की जानकारी साझा की। महतो ने डिजिटल पहुंच को भी दिव्यांगजनों के अधिकार के रूप में महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि दुनिया में लगभग हर छह में से एक व्यक्ति दिव्यांगता के साथ जीवन जीता है, इसलिए संसद और लोकतांत्रिक संस्थाओं की पहुंच को समावेशी बनाना महज सुविधा का विषय नहीं है।
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झारखंड के चुनावी मॉडल का भी किया उल्लेख
अध्यक्ष ने भारत के दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के तहत मान्य 21 प्रकार की दिव्यांगताओं का उल्लेख करते हुए दिव्यांगजनों के अधिकारों और लोकतांत्रिक भागीदारी पर प्रकाश डाला। उन्होंने झारखंड में वर्ष 2024 के निर्वाचन के दौरान दिव्यांग मतदाताओं के लिए उपलब्ध कराई गई सुविधाओं का भी उदाहरण दिया। इनमें पात्र दिव्यांग मतदाताओं के लिए घर से मतदान की सुविधा तथा मतदाताओं को पोलिंग बूथ तक वाहन से पहुंचाने जैसी व्यवस्थाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि चुनावी लोकतंत्र में किसी भी नागरिक की भागीदारी बाधित नहीं होनी चाहिए। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि संसदों और लोकतांत्रिक संस्थाओं को दिव्यांगजनों की जरूरतों के अनुरूप सुलभ बनाना समावेशी लोकतंत्र की बुनियादी शर्त है।
