रांची:
रांची के ट्यूलिप हॉस्पिटल का विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। भारतीय मजदूर संघ ने अस्पताल के बाहर धरना शुरू कर प्रशासन से पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है। संगठन ने अधिकारियों को आवेदन देकर जमीन से जुड़े रिकॉर्ड और अस्पताल के निर्माण से संबंधित दस्तावेजों की जांच की मांग की है। मरीज के परिजनों और अस्पताल कर्मचारियों के बीच विवाद के बाद अब रांची सिविल सर्जन की अगुवाई में एक टीम अस्पताल पहुंचकर मामले की जांच के बाद अस्पताल के लाइसेंस को निलंबित कर दिया था। मरीज के परिजनों से कथित मारपीट के बाद मामला अब अस्पताल की जमीन और भवन निर्माण की वैधता तक पहुंच गया है।

ST जमीन और CNT Act को लेकर उठे सवाल
भारतीय मजदूर संघ ने अस्पताल की जमीन को लेकर गंभीर दावे किए हैं। संगठन का कहना है कि जिस भूखंड पर अस्पताल का निर्माण हुआ है, उसकी जमीन की प्रकृति और पुराने रिकॉर्ड की जांच जरूरी है। संघ ने दावा किया है कि जमीन का संबंध आदिवासी यानी ST भूमि से हो सकता है और ऐसे में छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम यानी CNT Act के नियम लागू होने की स्थिति में जमीन के हस्तांतरण की वैधता भी जांच के दायरे में आनी चाहिए। संगठन ने स्वामित्व, हस्तांतरण, उपयोग और अन्य राजस्व दस्तावेजों की पड़ताल की मांग की है।
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निर्माण की अनुमति भी जांच के घेरे में
विवाद सिर्फ जमीन तक सीमित नहीं है। प्रदर्शनकारियों ने अस्पताल की बिल्डिंग के निर्माण की अनुमति, स्वीकृत नक्शे और जमीन के व्यावसायिक इस्तेमाल से जुड़े नियमों की भी जांच की मांग की है। वहीं, 10 सितंबर को अस्पताल में मरीज के परिजनों और कर्मचारियों के बीच विवाद और मारपीट की घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग ने नए मरीजों के रजिस्ट्रेशन, भर्ती और नई सर्जरी पर रोक लगाई थी। इसके बाद अस्पताल का पंजीकरण भी अगले आदेश तक निलंबित किया गया। अब प्रशासन की जांच से यह स्पष्ट होगा कि जमीन और निर्माण से जुड़े आरोपों में कितनी सच्चाई है।