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भारत के लिए जीते 4 गोल्ड, आज रांची के अरगोड़ा चौक पर सब्जी बेच रहे हैं खिलाड़ी अमरदीप कुमार

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रांची:
राजधानी रांची के अरगोड़ा चौक पर सब्जी बेचते एक युवक का वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। पहली नजर में यह किसी आम सब्जी विक्रेता की तस्वीर लगती है, लेकिन इस कहानी के पीछे छिपी सच्चाई लोगों को हैरान कर रही है। सब्जी तौलते नजर आ रहे अमरदीप कुमार कोई सामान्य दुकानदार नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके थ्रोबॉल खिलाड़ी हैं। उनके घर की दीवार पर देश के लिए जीते गए कई मेडल आज भी उनकी खेल उपलब्धियों की गवाही दे रहे हैं। एक ओर हाथ में तराजू है और दूसरी ओर देश के लिए जीते गए पदकों की यादें। अमरदीप की वर्तमान जिंदगी खेल प्रतिभाओं की उस चुनौती को सामने लाती है, जिसमें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन करने के बावजूद कई खिलाड़ियों को आर्थिक परेशानियों से जूझना पड़ता है।

 

 
मैदान में तिरंगा लहराने वाला खिलाड़ी आज सब्जी बेचने को मजबूर
अमरदीप ने वर्ष 2013 में थ्रोबॉल खेलना शुरू किया था। सीमित संसाधनों के बीच उन्होंने लगातार मेहनत की और धीरे-धीरे अपनी पहचान बनाई। खेल के प्रति जुनून और लगातार अभ्यास के दम पर उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में खेलने का अवसर मिला। आज वही खिलाड़ी परिवार की जिम्मेदारियां संभालने के लिए सब्जी बेच रहा है। हालांकि आर्थिक परिस्थितियों ने उनके सामने कई मुश्किलें खड़ी की हैं, लेकिन खेल को लेकर उनका उत्साह अब भी कम नहीं हुआ है। उनका कहना है कि वह रोजमर्रा की जिम्मेदारियों के साथ खेल से जुड़े रहना चाहते हैं और भविष्य में एक बार फिर देश के लिए पदक जीतने का सपना देखते हैं।


 

2015 में भारत के लिए जीता था गोल्ड, इसके बाद बढ़ता गया पदकों का सिलसिला
अमरदीप के करियर में वर्ष 2015 बेहद अहम रहा। उनका चयन जूनियर एशियाई चैंपियनशिप के लिए भारतीय टीम में हुआ। प्रतियोगिता में उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत के लिए स्वर्ण पदक हासिल किया। इस सफलता के बाद उन्होंने कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया। अलग-अलग मंचों पर बेहतर प्रदर्शन करते हुए उन्होंने देश और झारखंड का नाम रोशन किया। उनके नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चार गोल्ड मेडल होने की बात सामने आई है।


बेटे को विदेश भेजने के लिए परिवार ने लिया कर्ज, आर्थिक परेशानी बनी रही
अमरदीप की खेल यात्रा आसान नहीं रही। परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं होने के बावजूद उनके माता-पिता ने बेटे के खेल करियर को आगे बढ़ाने में पूरा सहयोग किया। प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने के लिए कई बार परिवार को उधार लेना पड़ा और कर्ज तक लेना पड़ा। परिवार का कहना है कि अमरदीप के देश के लिए खेलने के जुनून के सामने उन्होंने आर्थिक परेशानियों को कभी आड़े नहीं आने दिया। लेकिन हर प्रतियोगिता से पहले यात्रा, प्रशिक्षण और अन्य खर्चों की व्यवस्था करना परिवार के लिए बड़ी चुनौती बनी रही। मेडल और उपलब्धियां मिलती रहीं, लेकिन आर्थिक स्थिरता का इंतजाम नहीं हो सका। यही वजह है कि आज परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए अमरदीप को सब्जी बेचने का काम करना पड़ रहा है। 


 

सीनियर थ्रोबॉल चैंपियनशिप में भी भारत के लिए हासिल किया स्वर्ण
अमरदीप को नेपाल में आयोजित होने वाली सीनियर थ्रोबॉल चैंपियनशिप के लिए भारतीय टीम में चुना गया था। हालांकि प्रतियोगिता नेपाल में नहीं हुई और जून में रांची में इसका आयोजन किया गया। इस चैंपियनशिप में भी अमरदीप ने शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया। यह उपलब्धि बताती है कि आर्थिक परेशानियों के बावजूद अमरदीप ने खेल के प्रति अपना समर्पण नहीं छोड़ा है। परिवार चलाने के लिए उन्हें भले ही सब्जी बेचनी पड़ रही हो, लेकिन मैदान पर उतरने और देश के लिए पदक जीतने का जुनून अभी भी कायम है।


खेल विभाग से आर्थिक सहयोग की मांग, अब तक नहीं निकला ठोस रास्ता
अमरदीप ने अपनी आर्थिक स्थिति और खेल करियर को आगे बढ़ाने के लिए झारखंड सरकार, खेल निदेशालय और खेल विभाग से सहायता की मांग की है। उन्होंने विभाग को लिखित रूप से भी सहयोग के लिए आवेदन दिया है। अमरदीप का कहना है कि थ्रोबॉल को अक्सर दूसरे लोकप्रिय खेलों की तुलना में कम महत्व मिलता है। विभागीय स्तर पर उन्हें यह भी बताया जाता है कि थ्रोबॉल ओलंपिक खेल नहीं है, जिसके कारण इसे प्राथमिकता मिलने में कठिनाई होती है। वहीं, खेल निदेशालय की ओर से कहा गया है कि थ्रोबॉल खिलाड़ियों के लिए राज्य सरकार के स्तर पर कुछ प्रावधान मौजूद हैं। अमरदीप को किस योजना या मद के तहत सहायता दी जा सकती है, इसको लेकर विभागीय स्तर पर विचार किया जा रहा है।


 

चार गोल्ड के बाद भी संघर्ष जारी, अमरदीप को अब सरकारी मदद का इंतजार
अमरदीप की कहानी सिर्फ आर्थिक परेशानी की कहानी नहीं है, बल्कि यह सवाल भी खड़ा करती है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश के लिए पदक जीतने वाले खिलाड़ियों के लिए खेल करियर के बाद कितनी मजबूत व्यवस्था मौजूद है। एक खिलाड़ी जिसने देश के लिए स्वर्ण पदक जीते, अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व किया और आज भी खेल में आगे बढ़ने का सपना देख रहा है, उसे परिवार की जरूरतें पूरी करने के लिए सब्जी बेचनी पड़ रही है। सबसे बड़ी चुनौती यह है कि अगली प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के लिए भी आर्थिक संसाधनों की चिंता बनी हुई है। अमरदीप का कहना है कि वह परिस्थितियों से हार मानने वाले नहीं हैं। सब्जी बेचने के साथ वह अपने खेल से जुड़े रहेंगे और भविष्य में फिर देश के लिए पदक जीतने की कोशिश करेंगे। उनकी कहानी उन खिलाड़ियों के संघर्ष को सामने लाती है, जिनकी उपलब्धियां तो पदकों में दर्ज होती हैं, लेकिन उनकी रोजमर्रा की जिंदगी आर्थिक परेशानियों से जूझती रहती है।

 

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