रांची:
Jharkhand High Court News: झारखंड हाईकोर्ट ने शिक्षक और पर्यवेक्षक नियुक्ति से जुड़े मामलों में अभ्यर्थियों एवं कर्मियों को राहत देते हुए महत्वपूर्ण फैसले सुनाए हैं। अदालत ने संस्कृत, उर्दू, फारसी और अरबी के शिक्षकों की बहाली से जुड़ी उम्मीदवारी खारिज करने के नोटिस को रद्द कर नियुक्ति का रास्ता साफ किया है। वहीं, लेडी सुपरवाइजर नियुक्ति मामले में 12 अभ्यर्थियों को राहत देते हुए आरक्षित कोटे में नियुक्ति का आदेश दिया है। इसके अलावा, लंबे समय से संविदा पर कार्यरत मलेरिया और कालाजार टेक्निकल सुपरवाइजरों के नियमितीकरण से जुड़े मामले में भी सरकार के आदेश को खारिज कर दिया गया है।

चार सप्ताह में स्नातक प्रशिक्षित शिक्षक पद पर नियुक्ति का निर्देश
हाईकोर्ट ने संस्कृत, उर्दू, फारसी और अरबी विषयों के शिक्षकों की नियुक्ति से संबंधित मामले में अभ्यर्थियों की उम्मीदवारी खारिज करने के नोटिस को रद्द कर दिया है। अदालत ने संबंधित अभ्यर्थियों की नियुक्ति का रास्ता साफ करते हुए चार सप्ताह के भीतर स्नातक प्रशिक्षित शिक्षक पद पर नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया है।

लेडी सुपरवाइजर भर्ती में 12 अभ्यर्थियों को राहत
रांची। झारखंड हाईकोर्ट के जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने लेडी सुपरवाइजर नियुक्ति मामले में मुमताज बेगम एवं अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए 12 अभ्यर्थियों को बड़ी राहत दी है। यह मामला झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) के विज्ञापन संख्या 14/2023 से संबंधित है। अदालत ने कहा कि विज्ञापन में आवेदन की अंतिम तिथि से पहले का एनसीएल (नॉन क्रीमी लेयर) या ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र होना अनिवार्य नहीं किया गया था। ऐसे में बाद की तिथि में जारी प्रमाणपत्र के आधार पर अभ्यर्थियों को नियुक्ति प्रक्रिया से बाहर नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने अभ्यर्थियों को जारी सभी कारण बताओ नोटिस रद्द करते हुए उन्हें आरक्षित कोटे में लेडी सुपरवाइजर पद पर नियुक्त करने का आदेश दिया। अदालत ने नियुक्ति से संबंधित आदेश छह सप्ताह के भीतर जारी करने का निर्देश दिया। साथ ही, 21 जून 2023 के नोटिस को भी पूरी तरह रद्द कर दिया।
.jpeg)
11 संविदाकर्मियों के नियमितीकरण का रास्ता साफ
रांची। हाईकोर्ट के जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने संविदा पर कार्यरत मलेरिया और कालाजार टेक्निकल सुपरवाइजर (एमटीएस/केटीएस) के नियमितीकरण से जुड़े मामले में भी महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने राज्य सरकार के उस आदेश को खारिज कर दिया, जिसमें 11 कर्मियों के नियमितीकरण से इनकार किया गया था। ये कर्मी पिछले 14 से 18 वर्षों से सेवा दे रहे हैं। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि उन्हें उनकी प्रारंभिक नियुक्ति की तिथि से मलेरिया इंस्पेक्टर के वेतनमान में नियमित किया जाए। अदालत ने कहा कि जब सरकार समान प्रकृति के कार्य करने वाले एमपीडब्ल्यू कर्मियों को नियमित कर सकती है, तो उनके सुपरवाइजरों के साथ भेदभाव करना मनमाना और असंवैधानिक है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि नियमित पद उपलब्ध नहीं हैं, तो सरकार सुपरन्यूमेरेरी पदों का सृजन कर सकती है। अदालत ने आदेश का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के लिए 12 सप्ताह की समयसीमा निर्धारित की है।