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JREDA में चल रहा बड़ा खेल : निविदा प्रक्रिया में गड़बड़ी का मामला,  3 कंपनियां...एक ही नाम; दस्तावेजों में भी हुआ खेल!

निविदा प्रक्रिया में गड़बड़ी का मामला,  3 कंपनियां...एक ही नाम; दस्तावेजों में भी हुआ खेल!

द फॉलोअप डेस्क, रांची:

झारखंड रिन्युएबल एनर्जी डेवलपमंट एजेंसी (JREDA) से जुड़ी एक निविदा प्रक्रिया में अनियमितता और विसंगति की शिकायत सामने आई है। एक शिकायतकर्ता ने JUVNL के CMD को पत्र लिखकर JREDA में निविदा प्रक्रिया में 3 बोली दाता कंपनियों श्री कलेक्शन, श्री राम इंटरप्राइजेज और सनसाइन वेंचर्स के दस्तावेजों और उनके आपसी संबंधों को लेकर कई सवाल उठाते हुए मामले की स्वतंत्र एजेंसी से जांच की मांग की है। शिकायकर्ता ने उक्त तीन कंपनियों के बीच संभावित आपसी संबंध, समान संपर्क वितरण और दस्तावेजों में कथित विसंगतियों पर सवाल उठाया है। यहां यह जानना अहम है कि शिकायतकर्ता ने तीनों कंपनियों के बीच किस तरह की विसंगतियों की शिकायत की है। शिकायकर्ता ने बिंदुवार ढंग से सवाल उठाए हैं और जांच की मांग की है।

दस्तावेजों में भिन्नता से कंपनियों की स्वतंत्रता पर संदेह
दरअसल, इस शिकायत में कहा गया है कि अलग-अलग दस्तावेजों में कंपनियों के नाम, उद्यम रजिस्ट्रेशन, पेन, जीएसटी, पार्टनरशिप, मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी, कंपनी का पता, इलेक्ट्रिकल लाइसेंस, ऑडिट रिपोर्ट, पॉवर ऑफ अटॉर्नी और टेस्टिंग रिपोर्ट से जुड़ा अंतर दिखाई देता है। शिकायतकर्ता ने आशंका जताई है कि इन विसंगतियों की वजह से निविदा में कंपनियों की पात्रता और स्वतंत्रता पर असर पड़ सकता है।

शिकायतकर्ता ने प्रमुख रूप से तीनों कंपनियों के बीच समान संपर्क विवरण का दावा करते हुए कहा कि अभिषेक जालान नाम के व्यक्ति का मोबाइल नंबर (8092190099) तीनों संस्थाओं, मसलन- श्री कलेक्शन, श्रीराम इंटरप्राइजेज और सनसाइन वेंचर्स के उद्यम सर्टिफिकेट में दर्ज है। श्रीराम कलेक्शन और सनसाइन वेंचर्स के उद्यम सर्टिफिकेट में एक ही ईमेल आईडी awrwanchi@gmail.com दर्ज है।

शिकायत यह भी है कि इन दस्तावेजों में अभिषेक जालान को ही कंपनी का मालिक बताया गया है। शिकायत है कि ऐसी स्थिति में कैसे स्पष्ट होगा कि कंपनियों ने स्वतंत्र रूप से बीडिंग की और इनमें आपसी संपर्क नहीं है।

उद्यम और पार्टनरशिप डॉक्युमेंट में भी बड़े अंतर का दावा
दिलचस्प है कि श्री राम इंटरप्राइजेज के उद्यम सर्टिफिकेट में विवेक जालान नाम के व्यक्ति को मालिक बताया गया है, लेकिन उसमें abhishekjalan@live.in ईमेल आईडी दर्ज है, जिन्हें श्रीराम कलेक्शन और सनसाइन वेंचर्स के उद्यम सर्टिफिकेट में मालिक बताया गया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि इन समानताओं की जांच यह पता लगाने के लिए जरूरी है कि तीनों बोलीदाता वास्तव में एक-दूसरे से स्वतंत्र संस्थाएं हैं या नहीं।
शिकायतकर्ता ने श्री कलेक्शन के उद्यम और पार्टनरशिप डॉक्युमेंट में अंतर का आरोप लगाया है। इसमें सबसे अहम सवाल श्री कलेक्शन की पहचान और उसके साझेदारी स्वरूप को लेकर उठाया गया है।

दस्तावेजों के मुताबिक श्री कलेक्शन का उद्यम रजिस्ट्रेशन नंबर उद्यम जेएच-20-0002146 है। उद्यम रिकॉर्ड में व्यवसाय का संगठन पार्टनरशिप बताया गया है और इसमें महेश कुमार जैन का नाम दर्ज है। शिकायत में कहा गया है कि जीएसटी रजिस्ट्रेशन, पेन और JREDA को दिए गये बिड डिक्लेरेशन में श्री कलेक्शन को साझेदारी फर्म बताया गया है। इसमें रिचा जालान और अभिषेक जालान के बीच 50:50 हिस्सेदारी का उल्लेख है।

शिकायकर्ता का कहना है कि पार्टनरशिप डीड में महेश कुमार जैन का उल्लेख पार्टनर के तौर पर नहीं है, लेकिन उद्यम रिकॉर्ड में उनका नाम है। शिकायकर्ता का कहना है कि इसलिए उद्यम रजिस्ट्रेशन और पार्टनरशिप डीड के बीच संबंधों की जांच की मांग की गई है।

उद्यम नंबर और कंपनी के नाम में विसंगति का है आरोप
शिकायकर्ता ने उद्यम नंबर और कंपनी के नाम पर भी सवाल उठाया है। दावा है कि इसमें भी विसंगति है। दरअसल, शिकायतकर्ता का सवाल है कि टेंडर दस्तावेज में उद्यम जेएच-20-0002146 नंबर दर्ज है, लेकिन MSME अंडरटेकिंग में उद्यम-जेएच-20-0002416 नंबर दर्ज है। सवाल यह भी है कि कुछ दस्तावेजों में कंपनी का नाम श्री कलेक्शन तो कुछ दस्तावेजों में श्री कलेक्शंस लिखा है। कंपनी के नाम में यही अंतर उद्यम, जीएसटी, पैन, आईटीआर, पॉवर ऑफ अटॉर्नी, इलेक्ट्रिकल लाइसेंस और ऑडिट रिपोर्ट जैसे दस्तावेजों में भी है। जीएसटी रिकॉर्ड में श्री कलेक्शंस को पार्टनरशिप बताया गया है और रिचा जालान और अभिषेक जालान को इसका मैनेजिंग अथवा ऑथराइज्ड पार्टनर्स बताया गया है।

इलेक्ट्रिकल कॉन्ट्रैक्टर लाइसेंस और पता में भी अंतर
इलेक्ट्रिकल कॉन्ट्रैक्टर लाइसेंस के दस्तावेजों में भी विसंगतियां हैं। मसलन रिचा जालान को पार्टनर और अभिषेक जालान को मालिक बताया गया है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि टेंडर में जमा इलेक्ट्रिकल लाइसेंस में बदलाव करके अभिषेक जालान का नाम और विवरण हटाया गया है। मांग की गई है कि मूल लाइसेंस रिकॉर्ड को संबंधित विभाग से मंगाकर जमा किए गये दस्तावेज से मिलान किया जाए।

कंपनियों के पते में भी अंतर है। मसलन ऑडिट रिपोर्ट में कंपनी का पता 2nd फ्लोर, JDHI Street, Man Road, Ranchi लिखा है जबकि जीएसटी समेत अन्य रिकॉर्ड में MEPL Residency, Navin Mitra Road, Hatia/Lalpur, Ranchi का पता दर्ज है। ऑडिट रिपोर्ट में श्री कलेक्शंस के वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए वित्तीय विवरण का उल्लेख है। रिपोर्ट, के केजरीवाल एंड कंपनी की ओर से जारी किए जाने का उल्लेख किया गया है। शिकायकर्ता की मांग है कि ऑडिट रिपोर्ट के कुछ पन्नों पर चार्टड अकाउंटेंट के हस्ताक्षर और यूडीआईएन से जुड़े विवरण की पुष्टि की जाए।

एक ने दूसरी कंपनी का मैन्युफैक्चरर ऑथेराइजेशन फॉर्म लगाया
शिकायकर्ता ने केवल मौजूदा दस्तावेज ही नहीं, अपितु वित्तीय वर्ष 2024-25 के पुराने JREDA टेंडर से जुड़ी टेस्टिंग रिपोर्ट्स को लेकर भी सवाल उठाया है। दरअसल, यहां कन्फर्मिटी टेस्टिंग लैब प्राइवेट लिमिटेड की टेस्टिंग रिपोर्ट मौजूद है। एक रिपोर्ट में श्रीराम इंटरप्राइजेज तो दूसरे में श्री कलेक्शन का नाम दर्ज है। शिकायकर्ता का दावा है कि रिपोर्टों में बदलाव किे जाने की आशंका है। उसने मांग रखी है कि संबंधित लैब से मूल रिकॉर्ड मंगाकर टेंडर में जमा प्रतियों से उसका उचित मिलान किया जाये।

क्या वजह है कि श्रीराम इंटरप्राइजेज ने श्री कलेक्शन का मैन्युफैक्चरर ऑथेराइजेशन फॉर्म लगाया। दरअसल, श्रीराम इंटरप्राइजेज ने जो मैन्युफैक्चरर ऑथराइजेशन फॉर्म जमा किया है, उसे मैन्युफैक्चरर स्टेटकॉन एनर्जिया प्राइवेट लिमिटेड द्वारा जारी किया गया है। इसमें लिखा है कि ये ऑथराइजेशन फॉर्म दरअसल, श्री कलेक्शन द्वारा अधिकृत है। सवाल है कि यदि श्रीराम इंटरप्राइजेज और श्रीराम कलेक्शन अलग-अलग स्वतंत्र बोली दाता हैं तो एक कंपनी की निविदा में दूसरी कंपनी से संबंधित मैन्युफैक्चरर ऑथराइजेशन फॉर्म की भूमिका क्या है। दोनों कंपनियों के बीच वास्तविक कारोबारी संबंध क्या हैं।

श्रीराम इंटरप्राइजेज, श्री कलेक्शन और सनसाइन वेंचर्स ने निविदा प्रक्रिया के दौरान पॉवर ऑफ अटॉर्नी संबंधित जो दस्तावेज सौंपे हैं, उसमें भी विसंगतियों का आरोप है। दरअसल, तीनों कंपनियों के पॉवर ऑफ अटॉर्नी के लिए स्टांप ड्यूटी की जो रसीदें मौजूद हैं, उनमें JREDA के डायरेक्टर को सेकंड पार्टी के रूप में दिखाया गया है। इसमें पांच बिंदुओं में जांच की मांग की गई है। प्रिंसिपल की पहचान, अटॉर्नी की पहचान और नियुक्ति, पॉवर ऑफ अटॉर्नी जारी करने वाले व्यक्ति का अधिकार, अधिकृत हस्ताक्षर और दस्तावेज टेंडर की शर्तों के मुताबिक हैं कि नहीं।

शिकायकर्ता ने मांग रखी है कि बोली दाता संस्थाओं से कथित रूप से जुड़े राजेंद्र तिवारी, बबलू मरांडी और रमेश कुमार के बाहरी और आंतरिक प्रभावों और संबंधों की जांच की जाये।

इस रिपोर्ट में वह तमाम दस्तावेज संलग्न हैं, जिनके आधार पर झारखंड रिन्युएबल एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी (JREDA) की निविदा प्रक्रिया में श्री कलेक्शन, श्रीराम इंटरप्राइजेज और सनसाइन वेंचर्स के बीच आपसी संपर्क, संबंध और निविदा प्रक्रिया में उनकी पात्रता की जांच की मांग की गई है।

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