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"ईसाई पास्टर और पादरी का प्रवेश सख्त मना है", अब गुमला के कोब्जा गांव में ग्राम सभा ने लगाया बोर्ड! 

"ईसाई पास्टर और पादरी का प्रवेश सख्त मना है", अब गुमला के कोब्जा गांव में ग्राम सभा ने लगाया बोर्ड! 

सुशील सिंह/गुमला:

Jharkhand News: झारखंड के आदिवासी बहुल गांवों (Tribal-majority village) में धर्मांतरण अथवा मतांतरण (Religious conversion) के खिलाफ जैसे एक मुहिम की शुरुआत हो गई है। लोहरदगा के भंडरा प्रखंड अंतर्गत हाटी गांव, रांची के इटकी प्रखंड अंतर्गत हरमू सालोटोली और रांची के बोड़ेया के बाद अब गुमला के कोबजा (Kobja Village of Gumla) और रेमजा गांव में ईसाई धर्म से जुड़े पादरियों और पास्टरों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है। ग्रामीणों ने बकायदा पेसा कानून (PESA Act-1996) का हवाला देकर गांव के बाहर इस आशय का स्थायी बैनर लगा दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में अब से ईसाई धर्म से जुड़े पास्टर, पादरी और इस प्रकार के किसी भी धर्म प्रचारक को प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा।

गांव वालों का कहना है कि ईसाई समुदाय के लोग भोले-भाले ग्रामीणों को प्रलोभन देकर बहलाते-फुसलाते हैं और फिर धर्मांतरण कराकर संस्कृति और परंपराओं को नुकसान पहुंचाने की साजिश करते हैं। 

1 नवंबर को कोब्जा गांव में विशेष ग्राम बैठी
1 नवंबर को गुमला के रायडीह प्रखंड अंतर्गत कोबजा और रेमजा गांव में विशेष ग्राम सभा का आयोजन हुआ। ग्राम सभा के फैसले के मुताबिक गांव के बाहर स्थायी बैनर लगाकर ईसाई धर्म गुरुओं के प्रवेश पर रोक लगा दी गई। कार्यक्रम में भारतीय वित्त सेवा की अधिकारी निशा उरांव ने भी शिरकत की। धर्मांतरण को सरना समुदाय के लिए चिंता का विषय बताते हुए निशा उरांव ने कहा कि संविधान के मुताबिक यह इलाका 5वीं अनुसूची का क्षेत्र है। यहां पेसा कानून लागू है। कानून ने ग्राम सभा को ताकत दी है और उसी ताकत का इस्तेमाल करके ये आदिवासी अपनी संस्कृति, पंरपरा, भाषा और सभ्यता को संरक्षित  करने की कोशिश कर रहे हैं।  

निशा उरांव ने कहा कि ग्राम सभा द्वारा आदिवासियों का धर्मांतरण रोकने के लिए किए गये इस प्रयास को सुप्रीम कोर्ट भी सही मानता है। 

धर्मांतरण से आदिवासी संस्कृति को खतरा
सरना समुदाय के बिशु उरांव ने कहा कि ईसाई धर्मगुरु,  धर्मांतरण के जरिए उनकी सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं को नष्ट करने में लगे हैं। गांव की एक महिला ने नाराजगी भरे स्वर में कहा कि ईसाई समुदाय के लोग ना केवल आदिवासियों का धर्मांतरण करते हैं, बल्कि गांव में अवैध रूप से चर्च बनाया जा रहा है। ग्रामीणों ने कहा कि ईसाई धर्मगुरु उनका अस्तित्व मिटाने पर तुले हैं। 

गांव में ईसाई प्रार्थना प्रयोजन पर भी रोक
धर्मांतरण के खिलाफ बुलाई गई इस विशेष ग्राम सभा में हजारों लोग जुटे। आसपास के कई गांवों से लोगों ने इसमें शिरकत की। सरना रीति-रिवाज से पूजा-अर्चना के बाद बैनर स्थापित किया गया। बैनर में लिखा था पास्टर पादरी का प्रवेश सख्त मना है। ग्राम कोब्जा, थाना सुरसांग, जिला गुमला, झारखंड, भारत के संविधान की 5वीं अनुसूचि क्षेत्र के अंतर्गत आता है। हमारे गांव कोब्जा में पेसा अधिनियिम-1996 लागू है, जिसके अंतर्गत ग्राम सभा को अपनी परंपरा और रूढ़िवादी संस्कृति के संरक्षण का अधिकार है।

अत: हम ग्राम सभा के प्रस्ताव के आधार पर हमारे गांव कोब्जा में ईसाई धर्म के पास्टर, पादरी और अन्य धर्मांतरित व्यक्तियों के प्रवेश पर रोक लगाते हैं। गांव में ईसाई धर्म के किसी भी प्रार्थना प्रयोजन पर भी रोक लगाते हैं। 

रांची, लोहरदगा और गुमला में लगे हैं ऐसे बोर्ड
गौरतलब है कि झारखंड में कई आदिवासी बहुल गांवों में ईसाई धर्म प्रचारकों के प्रवेश पर रोक लगाई जा चुकी है। गुमला, लोहरदगा और रांची के कई गांवों में  ऐसी मुहिम छिड़ी है। पिछले दिनों रांची जिला के बोड़ेया पंचायत के संग्रामपुर गांव में भी मुखिया ने बोर्ड लगाने की बात कही थी। हालांकि, अभी तक इसे अमल में नहीं लाया गया है। गांवों में यह मुहिम का रूप लेता जा रहा है। सरना समुदाय के नेताओं  का कहना है कि आदिवासी अब विदेशी प्रोपगेंडा समझ गए हैं।  ईसाई धर्म में धर्मांतरित करने के पीछे प्रलोभन की साजिश को समझते हैं। देखना दिलचस्प होगा कि गुमला, लोहरदगा और रांची के कुछ गांवों में शुरू हुआ ये सिलसिला कहां तक पहुंचेगा। 

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