द फॉलोअप डेस्क:
राज्य में किराए के मकान या जर्जर भवनों में संचालित हो रहे आंगनवाड़ी केंद्रों को अब नजदीकी सरकारी विद्यालयों में स्थानांतरित किया जाएगा। ऐसे सभी केंद्रों को उनके एक किलोमीटर के दायरे में स्थित सरकारी स्कूलों में शिफ्ट करने की योजना है। केंद्र प्रायोजित मिशन सक्षम आंगनवाड़ी एवं पोषण 2.0 के तहत पहले चरण के सर्वे में ऐसे 12,202 आंगनवाड़ी केंद्रों की पहचान की गई है। महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग ने इन केंद्रों को विद्यालयों में स्थानांतरित करने की प्रक्रिया तेज कर दी है। बीते मई माह के अंत में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, जो महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग के मंत्री भी हैं, ने विभाग की विभिन्न योजनाओं की समीक्षा की थी। इस दौरान उन्होंने आंगनवाड़ी केंद्रों को सरकारी विद्यालयों में स्थानांतरित करने की योजना को जल्द धरातल पर उतारने का निर्देश दिया था। विभाग ने दिसंबर 2026 तक इस योजना को पूरी तरह लागू करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके साथ ही तीन से छह वर्ष तक के सभी बच्चों की अपार आईडी बनाने और पीएम-जनमन तथा धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान (DAJGUA) के तहत संचालित आंगनवाड़ी केंद्रों का शत-प्रतिशत संचालन सुनिश्चित करने का भी लक्ष्य रखा गया है।

स्कूलों में आंगनवाड़ी केंद्र आने से बच्चों को मिलेंगे कई फायदे
विभाग के अनुसार, आंगनवाड़ी केंद्रों को सरकारी विद्यालयों के परिसर में स्थानांतरित करने से बच्चों को कई स्तर पर लाभ मिलेगा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के तहत बच्चों की प्री-स्कूल शिक्षा तीन वर्ष की उम्र से शुरू होती है। ऐसे में आंगनवाड़ी केंद्रों के स्कूलों से जुड़ने पर प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा (ECCE) को विद्यालयी शिक्षा के साथ बेहतर तरीके से एकीकृत किया जा सकेगा। इससे बच्चों को स्कूल में प्रवेश से पहले ही शैक्षणिक माहौल मिलेगा और कक्षा एक में बच्चों का शत-प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। वहीं, भवनहीन या किराए के मकानों में चल रहे आंगनवाड़ी केंद्रों को स्कूल परिसर में जगह मिलने से उन्हें आवश्यक बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध हो सकेंगी।
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आंगनवाड़ी और स्कूल साझा करेंगे संसाधन और प्रशिक्षण
विद्यालय परिसर में आंगनवाड़ी केंद्रों के संचालन से स्कूल और आंगनवाड़ी के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा। दोनों संस्थान ECCE-FLN (प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा तथा बुनियादी साक्षरता एवं संख्या ज्ञान) से संबंधित पाठ्य-सामग्री साझा कर सकेंगे। इसके अलावा शिक्षकों और आंगनवाड़ी सेविकाओं के प्रशिक्षण में भी समन्वय स्थापित किया जाएगा। इससे बच्चों के शुरुआती शैक्षणिक विकास को और मजबूत करने में मदद मिलेगी।
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दिसंबर 2026 तक सभी बच्चों की अपार आईडी बनाने का लक्ष्य
विभाग ने आंगनवाड़ी केंद्रों में पंजीकृत तीन से छह वर्ष की आयु के सभी बच्चों की अपार आईडी बनाने का भी लक्ष्य तय किया है। इसके लिए पोषण ट्रैकर पोर्टल और मोबाइल ऐप के माध्यम से प्रक्रिया चल रही है। केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के तहत ‘वन नेशन, वन स्टूडेंट आईडी’ व्यवस्था के तहत प्री-स्कूल बच्चों की अपार आईडी आंगनवाड़ी स्तर पर ही तैयार की जा रही है। इसका उद्देश्य बच्चों के स्कूल में प्रवेश से पहले ही उनका डिजिटल शैक्षणिक रिकॉर्ड तैयार करना है। वर्तमान में राज्य के आंगनवाड़ी केंद्रों में पंजीकृत करीब 25 से 30 प्रतिशत बच्चों के पास ही आधार उपलब्ध है। शेष बच्चों की अपार आईडी तैयार करने की प्रक्रिया जारी है। विभाग ने दिसंबर 2026 तक शत-प्रतिशत बच्चों की अपार आईडी बनाने का लक्ष्य रखा है।
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पीएम-जनमन और धरती आबा अभियान के केंद्रों का भी होगा शत-प्रतिशत संचालन
विभाग ने प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम-जनमन) और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान (DAJGUA) के तहत संचालित आंगनवाड़ी केंद्रों के शत-प्रतिशत संचालन का भी लक्ष्य तय किया है। विभाग का प्रयास है कि दिसंबर 2026 तक इन योजनाओं के तहत आने वाले सभी आंगनवाड़ी केंद्र पूरी तरह सक्रिय हों और बच्चों को पोषण, स्वास्थ्य एवं प्रारंभिक शिक्षा से जुड़ी सेवाएं नियमित रूप से मिल सकें।