द फॉलोअप डेस्क
बिहार में शराबबंदी कानून को लागू हुए 5 अप्रैल को 10 साल पूरे हो गए हैं। गौरतलब हो कि नीतीश कुमार ने अप्रैल 2016 में राज्य में पूर्ण शराबबंदी लागू की थी। दरअसल राजद के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने बिहार में शराबबंदी को पूरी तरह विफल करार देते हुए आज सोशल मीडिया पर एक पोस्ट किया। तेजस्वी यादव ने अपने पोस्ट में नीतीश सरकार से सवाल पूछते हुए लिखा कि राज्य में शराबबंदी की विफलता का दोषी कौन है? मेरे सवालों, तर्कों और तथ्यों का जवाब दें। आगे उन्होंने लिखा कि शराबबंदी क़ानून को लागू किए कल ???????? वर्ष पूर्ण हुए लेकिन यह शासन-प्रशासन और शराब माफिया के नापाक मजबूत गठजोड़ की बदौलत यह क़ानून अपने उद्देश्य की पूर्ति में एकदम विफल रहा। शराबबंदी नीतीश कुमार का सबसे बड़ा सांस्थानिक भ्रष्टाचार साबित हुआ। आगे लिखते हुए तेजस्वी यादव ने ये दावा किया कि शराबबंदी के कारण बिहार में ???????? हज़ार करोड़ की अवैध समानांतर अर्थव्यवस्था खड़ी हो गई है। उन्होंने नीतीश सरकार को घेरते हुए लिखा कि शराबबंदी क़ानून के क्रियान्वयन की देखरेख वाले गृह और मद्य निषेध विभाग भी अधिकांश इनके पास ही रहे है।

राज्य में शराबबंदी लागू होने के बावजूद भी बिहार में ???????? लाख केस दर्ज किए गए हैं, जबकि ???????? लाख से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है। वहीं अब तक ???? करोड़ लीटर से अधिक शराब जब्त की गई है। आगे उन्होंने कहा कि विगत ???? सालों में ???? करोड़ लीटर से अधिक शराब जब्त की गई है, जो प्रतिदिन औसतन ???????? हजार लीटर से अधिक है। इस दौरान तेजस्वी ने बिहार पुलिस के आंकड़ों का भी जिक्र किया और लिखा कि बिहार पुलिस की माने तो ???????????????? में औसतन ???? लाख ???????? हजार ???????????? लीटर प्रति महीने अवैध शराब बरामद की गई है। यानि ????????,???????????? लीटर प्रतिदिन शराब बरामदगी की गई है। उन्होंने आगे लिखा कि यह तो सिर्फ दिखावटी जब्त शराब है लेकिन जमीनी सच्चाई तो कुछ और ही है। दरअसल तेजस्वी यादव ने दावा किया कि बिहार में प्रतिदिन शराब की खपत ???? लाख ???????? हजार लीटर से अधिक की है। बिहार सरकार के मुताबिक़ ???????????????? में ???????? प्रतिशत अधिक शराब बरामद की गई यानि शराबबंदी और पुलिस के दकियानुसी आंकड़ों के बावजूद भी बरामदगी में ????????% का उछाल है। उन्होंने आरोप लगाया कि अवैध शराब के अलावा इस कानून की विफलता के कारण बिहार में सूखा और अन्य प्रकार के नशे की सामग्री का कारोबार ???????? फ़ीसदी बढ़ा है।

राज्य के युवा, गांजा, ब्राउन शुगर और नशीली दवाओं का सेवन कर रहे हैं। आगे उन्होंने सवाल उठाते हुए लिखा कि अब आप कल्पना करिए कि वास्तविकता में बिहार में शराब की उपलब्धता कितनी सहज और सरल है? सरकार यह क्यों नहीं बताती कि बिहार की सीमा में करोड़ो लीटर शराब कब, कैसे, क्यों और किसके सहयोग से आ रही है? कोई पैराशूट से तो गिराकर जाता है नहीं? इस दौरान तेजस्वी ने आगे लिखा कि सरकार जब्त की हुई शराब की बजाय खपत किए हुए शराब के आंकड़े सार्वजनिक करें।
आगे उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा कि आज़ादी के बाद ???????????????? से लेकर ???????????????? में एनडीए की सरकार बनने तक बिहार में केवल ???????????????? दुकाने ही थी। लेकिन नीतीश कुमार ने ???????? वर्षों में ही इसे बढ़ाकर दुगुना कर दिया। आज ये शराबबंदी के नाम पर सुधारक बनने का स्वांग कर रहे है लेकिन यथार्थ यह है कि इसके नाम पर इन्होंने संस्थागत भ्रष्टाचार को बढ़ावा देकर अफसरशाही को बेलगाम, भ्रष्ट, आरामपरस्त और तानाशाह बनाया है। तेजस्वी ने नीतीश सरकार पर तंज कसते हुए लिखा कि बिहार में शराबबंदी कानून अब मजाक बन गया है।

इस कानून की आड़ में केवल गरीबों को निशाना बनाया जा रहा है। शराबबंदी कानून के तहत करीब ???????? लाख से अधिक जिन लोगों की गिरफ्तारियां हुई हैं इनमें सबसे अधिक गरीब, दलित, पिछड़े और अति पिछड़े वर्ग के लोग हैं। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि बिहार में शराबबंदी को लेकर सर्वोच्च न्यायालय ने भी टिप्पणी की है। पुलिस के कारण ही शराब की तस्करी हो रही है और पुलिस का एकमात्र काम रह गया है भ्रष्टाचार, उगाही और कानून का दुरुपयोग करने वालों को संरक्षण देना। उन्होंने आरोप लगाया कि ???????? लाख लोगों की गिरफ्तारी के बावजूद भी सप्लायर और तस्करों को गिरफ्तार नहीं किया गया, किसी भी जिले के एसपी, डीएसपी या बड़े अधिकारी पर कार्रवाई नहीं की गई है. उन्होंने यहां तक कहा कि सरकार जिसको चाहती है, उसी पर कार्रवाई होती है, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सवाल उठाते हुए लिखा कि सरकार उन अधिकारियों और प्रशासनिक लोगों पर कार्रवाई क्यों नहीं करती जो भ्रष्टाचार के माध्यम से शराबबंदी को विफल करना चाहते हैं?