द फॉलोअप डेस्क
बिहार के बैंकों (Banks in Bihar) में 2600 करोड़ की रकम लावारिस पड़ी है। जिन खातों में यह रकम है उससे 10 साल से कोई लेनदेन नहीं हुई है। यही नहीं बीते 10 साल से रकम निकालने या उसपर अपनी दावेदारी ठोकने कोई बैंक भी नहीं पहुंचा है। बैंक अधिकारियों का कहना है कि बैंक की ओर से ऐसी रकम का ब्योरा तैयार किया जा रहा है। इन्हें रिजर्व बैंक (Reserve Bank Of India) के जमाकर्ता शिक्षा और जागरुकता कोष में ट्रांसफर कर दिया जाएगा।

बैंकों में धोखाधड़ी के खतरों को कम करने के लिए निष्क्रिय खातों को अलग करना महत्वपूर्ण
केंद्रीय बैंक के अनुसार, बैंकों को उनके यहां किसी भी जमा खाते में 10 साल या उससे अधिक समय से पड़ी राशि को रिजर्व बैंक के जमाकर्ता शिक्षा और जागरुकता कोष में ट्रांसफर करना आवश्यक है। बैंकों को सालाना उन खातों की समीक्षा करनी होगी, जहां एक साल या ज्यादा समय से ग्राहक ने कोई जमा- निकासी (ट्रांजैक्शन) नहीं की है। बैंकों को खाताधारकों यानि ग्राहकों को इस बारे में लिखित तौर पर सूचना देनी होगी। ग्राहक अगर निष्क्रियता का कारण बताते हुए जवाब दाखिल करते हैं तो बैंकों को एक और साल के लिए खाता को चालू श्रेणी में रखना होगा। अर्थात, अगले एक साल तक वो खाते को निष्क्रिय नहीं करार दे सकते। बैंकों में धोखाधड़ी के खतरों को कम करने के लिए निष्क्रिय खातों को अलग करना महत्वपूर्ण है। बताया गया कि निष्क्रिय खातों में फ्रॉड की बढ़ती घटनाओं के मद्देनजर फिर से सक्रिय किए गए खातों में लेनदेन की निगरानी कम से कम 6 महीने तक नियमित रूप से करनी है।

लावारिस रकम के भुगतान के लिए करना होगा ऑनलाइन आवेदन
अधिकारियों ने बताया कि लावारिस रकम के भुगतान के लिए ऑनलाइन आवेदन करना होगा। इसके बाद ही लोगों को ये रुपये लौटाये जायेगे। हालांकि, ये दावा बैंक के हैं। अधिकारियों ने आगे बताया कि ऐसा होता है कि लोग रुपये जमा कराते हैं, जिनकी रकम नहीं निकल पाती है। कभी उनका नॉमिनी नहीं होने से, तो कभी ग्राहक की मृत्यु होने से तो कभी दूसरे शहरों में चले जाने या अन्य दूसरे वजहों से लोग इसे भूल जाते हैं। छोटी रकम होने के कारण कागजी प्रक्रिया पूरा नहीं कर पाने के कारण भी कई लोग राशि छोड़ देते हैं। ऐसे बैंक खातों में 10 साल कोई लेन-देन नहीं होने पर संचालन बंद कर दिया जाता है।