समस्तीपुर/बिहार
समस्तीपुर में सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर 105 लड़के-लड़कियों को झांसा देकर बंधक बनाया लिया गया। इन सभी को गेलवे प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी द्वारा नौकरी दिलाने का झांसा दिया गया था। सूचना मिलते ही मुफस्सिल थाना पुलिस ने धरमपुर और मुसापुर स्थित दस अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी की और मामले से जुड़े इस ठगी करने वाले बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ किया।

पीड़ितों में 67 लड़के और 38 युवतियां
इस नेटवर्क का भंडाफोड़ करने औऱ सभी लड़के-लड़कियों को इस चंगुल से छुड़ाने के लिए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की मदद से बुधवार रात से गुरुवार की सुबह सात बजे तक अभियान चलाया गया। मुक्त कराये गये पीड़ितों में 67 लड़के और 38 युवतियां शामिल हैं। उनमें 39 नाबालिग हैं। इस गिरोह का पर्दाफाश करते हुए पुलिस ने तीन महिलाओं समेत नौ आरोपितों को हिरासत में लिया है। पुलिस द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, सरगना आर्यन फरार है। पुलिस के मुताबिक, असम, झारखंड, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश समेत कई अन्य राज्यों के लड़के-लड़कियों को सरकारी नौकरी का झांसा देकर बुलाया गया था। इस दौरान उनसे मोटी रकम वसूला गया औऱ उनके प्रमाण-पत्र और मोबाइल भी जब्त कर लिये गये थे। पीड़ितों में ज्यादातर भूटान सीमा से सटे असम के तामुलपुर, मंगलदोई, भैरवकुंड, उदालगुड़ी, तिनसुकिया और दिमाकुची के रहने वाले हैं।

मानवाधिकार आयोग के सदस्य अभ्यर्थी बन किया पर्दाफाश
एएसपी संजय कुमार पांडेय ने बताया कि मानव तस्करी, अवैध रूप से बंधक बनाकर रखने, धोखाधड़ी और ठगी समेत अन्य आपराधिक धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। रेस्क्यू अभियान में छह थानों की पुलिस और करीब 150 से अधिक जवान शामिल रहे। वहीं एसपी अमरेंद्र प्रताप सिंह ने भी मुफस्सिल थाना पहुंचकर पीड़ितों से पूछताछ की। आर्यन और अन्य की गिरफ्तारी को लेकर भी एसआईटी गठन की गई है। बताया जा रहा है कि सभी को दस अलग-अलग मकानों में रखा गया था। यहां उनके लिए खाने-पीने से लेकर सभी व्यवस्थाएं की गई थीं। फिलहाल पुलिस द्वारा सभी कमरों को सील कर दिया गया है। जानकारी यह भी है कि मानवाधिकार आयोग के सदस्य ने 'उम्मीदवार' बनकर इस गिरोह की रेकी की थी। वह वह नौकरी लेने के लिए इच्छुक अभ्यर्थी बनकर समस्तीपुर पहुंचे। उसके बाद कालिका कॉम्प्लेक्स, मुसापुर और धरमपुर के ठिकानों का दौरा किया। उनका कहना है कि संचालकों ने उन्हें भी नौकरी का झांसा देकर 25 हजार रुपये जमा करने को कहा था।