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चितवन निकुंज के चर्चित हाथी रोनाल्डो की मौत, बिजली के तार की चपेट में आने से गई जान; 33 बच्चों का था पिता

चितवन निकुंज के चर्चित हाथी रोनाल्डो की मौत, बिजली के तार की चपेट में आने से गई जान; 33 बच्चों का था पिता

द फॉलोअप डेस्क, रांचीः 

वाल्मीकिनगर नेपाल के चितवन राष्ट्रीय निकुंज के चर्चित और बलशाली जंगली हाथी रोनाल्डो की मौत हो गई। शनिवार शाम बीस हजारी ताल के पास सड़क किनारे उसका शव मिला। प्रारंभिक जांच में बिजली के करंट की चपेट में आने से उसकी मौत की बात सामने आई है। करीब 53 वर्षीय रोनाल्डो चितवन क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय था और अपनी कद-काठी व सक्रियता के कारण स्थानीय लोगों के साथ-साथ पर्यटकों के बीच भी काफी चर्चित था। उसकी मौत से चितवन निकुंज प्रशासन और वन्यजीव प्रेमियों में शोक का माहौल है। स्थानीय लोगों ने सड़क किनारे हाथी को मृत पड़ा देखा, जिसके बाद करीब 700 मीटर दूर स्थित नेपाली सेना के सुरक्षा पोस्ट को इसकी सूचना दी गई। जानकारी मिलते ही चितवन निकुंज के सुरक्षाकर्मी, चिकित्सक और नेपाली सेना के जवान मौके पर पहुंचे। जांच के दौरान मृत हाथी की पहचान रोनाल्डो के रूप में हुई। निकुंज के सूचना अधिकारी अविनाश थापा मगर के अनुसार, वरांडाभार पोस्ट के पास नेपाली सेना की ओर से करीब 17 फीट की ऊंचाई पर बिजली का तार लगाया गया था। जांच में सामने आया कि रोनाल्डो इसी बिजली के तार की चपेट में आया, जिसके बाद उसकी मौत हो गई।

33 बच्चों का पिता था रोनाल्डो

रोनाल्डो सिर्फ अपनी ताकत और विशाल कद-काठी के लिए ही नहीं, बल्कि चितवन निकुंज के हाथी प्रजनन कार्यक्रम में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका के लिए भी जाना जाता था। सौराहा हाथीशाला में उसके 33 बच्चे बताए गए हैं। इसके अलावा छह हथिनियों के गर्भवती होने की जानकारी भी सामने आई है। ऐसे में रोनाल्डो की मौत को हाथी प्रजनन कार्यक्रम के लिए भी एक महत्वपूर्ण क्षति के तौर पर देखा जा रहा है।

पोस्टमार्टम के बाद किया गया अंतिम संस्कार

घटना के बाद चितवन निकुंज के चिकित्सकों की टीम ने रोनाल्डो के शव का पोस्टमार्टम किया। प्रक्रिया के दौरान उसके दोनों दांत निकाल लिए गए। इसके बाद नेपाली सेना के आर्मी पोस्ट के पास गड्ढा खोदकर उसके शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया। वर्षों से चितवन के सौराहा और खोरसोर क्षेत्र में सक्रिय रहे रोनाल्डो की अचानक मौत ने वन्यजीव प्रेमियों को भावुक कर दिया है। एक ऐसा हाथी, जो चितवन की पहचान और प्रजनन कार्यक्रम का अहम हिस्सा बन चुका था, अब हमेशा के लिए इतिहास का हिस्सा हो गया।

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