बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव:
बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव अब दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गया है। इस सीट पर महागठबंधन की ओर से राष्ट्रीय जनता दल ने रेखा गुप्ता को चुनावी मैदान में उतारा है। रेखा गुप्ता अतिपिछड़ा वर्ग से आती हैं। वह वर्ष 2025 के विधानसभा चुनाव में भी राजद के टिकट पर बांकीपुर सीट से चुनाव लड़ चुकी हैं। इस क्षेत्र में उनकी लगातार सक्रियता, जमीनी पकड़ और स्थानीय कार्यकर्ताओं के साथ बेहतर तालमेल को देखते हुए पार्टी नेतृत्व ने एक बार फिर उन पर भरोसा जताया है। राजद ने उनकी जीत का दावा किया है।
बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र उपचुनाव में महागठबंधन की ओर से अतिपिछड़ा वर्ग से आने वाली राजद नेत्री श्रीमती रेखा गुप्ता जी को प्रत्याशी घोषित किया गया है।
— Rashtriya Janata Dal (@RJDforIndia) July 6, 2026
बीजेपी ने 40 वर्षों से बांकीपुर की जनता को ठगा है। राजधानी पटना की सीट रहने के बावजूद यहाँ मूलभूत जन सुविधाओं का घोर अभाव है।… pic.twitter.com/8SqlGiqxgY
राष्ट्रीय जनता दल ने बीजेपी पर साधा निशाना
राजद नेताओं का कहना है कि बांकीपुर क्षेत्र की जनता लंबे समय से मूलभूत सुविधाओं की कमी से परेशान है। पार्टी ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि राजधानी पटना की महत्वपूर्ण सीट होने के बावजूद यहां विकास कार्य अपेक्षा के अनुरूप नहीं हुए हैं। बरसात के मौसम में जलजमाव समेत कई समस्याओं का सामना लोगों को करना पड़ता है। राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव और कार्यकारी अध्यक्ष सह नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के निर्देश पर रेखा गुप्ता के नाम पर सहमति बनी। राजद के प्रधान महासचिव अब्दुल बारी सिद्दीकी और प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल ने उनके नाम की घोषणा की। महागठबंधन नेताओं ने दावा किया कि जनता के समर्थन और विश्वास के आधार पर रेखा गुप्ता की जीत तय है।

प्रशांत किशोर के चुनाव मैदान में उतरने से बदला समीकरण
वहीं, जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर के खुद चुनाव मैदान में उतरने से बांकीपुर का मुकाबला और रोचक हो गया है। प्रशांत किशोर बिहार में रोजगार, शिक्षा, बेहतर प्रशासन और व्यवस्था परिवर्तन जैसे मुद्दों को लेकर शहरी युवाओं, पेशेवर वर्ग और न्यूट्रल वोटरों को साधने की कोशिश कर रहे हैं। दूसरी ओर, राजद के उम्मीदवार घोषित होने के बाद चुनावी समीकरण में बदलाव देखने को मिल रहा है। बांकीपुर में राजद का पारंपरिक MY वोट बैंक पहले से मजबूत माना जाता है। प्रशांत किशोर के मैदान में उतरने के बाद ऐसी चर्चाएं थीं कि पर्दे के पीछे महागठबंधन का एक वर्ग उन्हें समर्थन दे सकता है। हालांकि, अगर विपक्षी वोटों का बंटवारा होता है तो इसका सीधा फायदा बीजेपी को मिल सकता है।
बीजेपी के गढ़ में त्रिकोणीय मुकाबले के आसार
बांकीपुर विधानसभा सीट वर्ष 1995 से बीजेपी का गढ़ रही है। ऐसे में इस बार का चुनाव बीजेपी की पारंपरिक पकड़, राजद की चुनावी रणनीति और जन सुराज के भविष्य की परीक्षा के तौर पर देखा जा रहा है। बांकीपुर की लड़ाई अब सिर्फ एक विधानसभा सीट तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह बिहार की बदलती राजनीतिक दिशा और नए सियासी समीकरणों का भी संकेत दे सकती है।