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नालंदा मिड-डे-मिल मामले में शिक्षा विभाग ने लिया एक्शन, प्रभारी शिक्षिका से 24 घंटे के भीतर मांगा जवाब

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नालंदा/बिहार
नालंदा जिले में मिड-डे मील भोजन करने के बाद बुधवार को 50 से अधिक बच्चे बीमार पड़ गए थे। इस मामले में शिक्षा विभाग ने कड़ा रुख अपनाते हुए प्रभारी प्रधानाध्यपक को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। विभाग ने अल्टीमेटम देते हुए 24 घंटे के भीतर स्पष्टीकरण की मांग की है। घटना जिले के नारनौसा प्रखंड मध्य विद्यालय कोला का है।
 

50 से अधिक बच्चों की बिगड़ी थी तबीयत 
विद्यालय में 20 मई को मिड-डे-मिल भोजन करने के बाद लगभग 50 से अधिक बच्चों ने उल्टी, दस्त, कमजोरी, चक्कर, घबराहट और पेट दर्द की शिकायत की थी। इस भोजन को खाने के बाद कई बच्चे स्कूल परिसर में बेहोश भी हो गए थे। इस घटना के बाद स्कूल में अफरा-तफरी का माहौल बन गया था। बच्चों के तबीयत बिगड़ने के बाद स्कूल प्रबंधन द्वारा आनन-फानन में अस्पताल में भर्ती करवाया गया था, जहां डॉक्टरों द्वारा उनका इलाज चल रहा था। इस दौरान ये भी खबर निकल कर आई थी कि एक शिक्षक भी इसी खाना को खाए थे जिसके बाद उनका भी तबीयत बिगड़ने के बाद अस्पताल में भर्ती किया गया था। पूछताछ में बच्चों ने बताया था कि खाना में कोई दवा की एक गोली मिली थी। इसी खाना को खाने के बाद सबकी तबीयत बिगड़ी थी। बच्चों ने बताया था कि उन्हें भोजन में छोले-चावल परोसे गए थे। इस घटना के बाद से अभिभावकों में भारी गुस्सा और नाराजगी देखी गई। बीते कुछ दिन पहले सहरसा जिले के भी एक स्कूल से ऐसी ही शिकायतें आईं थीं। वहां भी लगभग दर्जनों बच्चें मिड-डे-मिल भोजन करने के बाद बीमार पड़ गए थे। उस दौरान बच्चों ने ये आरोप लगाया था कि खाने में सांप का बच्चा मिला था, जिसे खाने के बाद सभी बच्चों की तबीयत बिगड़ी थी। 

विभाग ने दी चेतावनी
लगातार मिड-डे-मिल भोजन में लापरवाही देखी जा रही है। इसे देखते हुए प्रशासन तुरंत हरकत में आया। हिलसा एसडीओ, जिला शिक्षा पदाधिकारी और शिक्षा विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी भारी पुलिस बल के साथ अस्पताल पहुंचे और पूरे मामले की निगरानी शुरू की। डॉक्टरों की टीम लगातार बच्चों की स्थिति पर नजर बनाए हुए है। इस घटना के बाद जिला शिक्षा पदाधिकारी ने सख्त रुख अपनाते हुए प्रभारी प्राथमिका अध्यापिका रजनी कुमारी को 24 घंटे के भीतर स्पष्टीकरण देने का आदेश जारी किया है। विभाग की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि मिड-डे मील योजना के संचालन में गंभीर लापरवाही बरती गई है। बच्चों के स्वास्थ्य के प्रति उदासीनता दिखाई गई है। विभाग द्वारा सख्त लहजे में चेतावनी दी गई है कि यदि जवाब संतोषजनक नहीं मिला तो कड़ी अनुशासनिक कार्रवाई की जाएगी।

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