पटना/बिहार
PMCH में पत्रकारों के साथ कथित मारपीट की घटना पर स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने स्पष्ट बयान दिया है। उन्होंने कहा कि संविधान ने मीडिया को अपनी जिम्मेदारी निभाने का अधिकार दिया है। पत्रकार बिना किसी भय के अस्पतालों में जाकर रिपोर्टिंग कर सकते हैं। पत्रकारों को तथ्य जुटाने और जनहित के मुद्दों को सामने लाने से नहीं रोका जा सकता। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में पत्रकारिता की अहम भूमिका है। यदि कहीं से कोई शिकायत सामने आती है तो उसकी गंभीरता से जांच की जाएगी।

इलाज के लिए पटना का रुख न करना पड़े
मीडिया से बातचीत के दौरान स्वास्थ्य मंत्री ने राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी रोडमैप को सामने रखा। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि आम मरीजों को नजदीकी केंद्रों में ही इलाज की सुविधा मिले। छोटी-बड़ी बीमारियों के इलाज के लिए पटना का रुख न करना पड़े। गॉल ब्लैडर, अपेंडिक्स समेत सामान्य ऑपरेशन और इलाज की सुविधाएं जिला अस्पतालों में ही उपलब्ध कराई जाएंगी। सभी सिविल सर्जनों और स्वास्थ्य अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि जिन बीमारियों का इलाज जिलों में संभव है, उन्हें वहीं किया जाए। केवल गंभीर और अति विशिष्ट मामलों को ही PMCH, IGIMS और अन्य बड़े चिकित्सा संस्थानों में रेफर किया जाए।

आधुनिक चिकित्सा पद्धति के अनुरूप बेहतर इलाज
उन्होंने बताया कि जिला अस्पतालों में कार्यरत चिकित्सकों और जूनियर डॉक्टरों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि वे आधुनिक चिकित्सा पद्धति के अनुरूप बेहतर इलाज उपलब्ध करा सकें। सरकार का उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं का विकेंद्रीकरण कर मरीजों को उनके जिले में ही गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है। हालांकि स्वास्थ्य मंत्री ने स्पष्ट किया कि ओपन हार्ट सर्जरी जैसी जटिल बीमारियों के लिए मरीजों को अभी भी पटना के बड़े अस्पतालों में आना पड़ सकता है। लेकिन सरकार की कोशिश है कि अधिकतम बीमारियों का इलाज जिला स्तर पर ही सुनिश्चित किया जाए। स्वास्थ्य मंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब बिहार में स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच, अस्पतालों की कार्यप्रणाली और मरीजों को मिलने वाली सेवाओं को लेकर लगातार बहस जारी है।