बिहार :
नीतीश कुमार को “कुर्मी चेतना” रैली के मंच पर लाने वाले पूर्व विधायक सतीश कुमार नहीं रहे। जानकारी के अनुसार, ब्रेन हैमरेज के बाद उनकी हालत गंभीर हो गई थी जिसके बाद उन्हें पटना के फोर्ड हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। इलाज के दौरान उन्होंने मंगलवार की सुबह पौने सात बजे अंतिम सांस ली। सतीश कुमार अस्थावां और सूर्यगढ़ा से विधायक रहे थे। 1994 में पटना के ऐतिहासिक गांधी मैंदान में कुर्मी चेतना महारैली हुआ था जिसके सफल आयोजन के बाद उन्हें पूरे बिहार में एक नई पहचान मिली थी। उनके निधन से नालंदा सहित पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है। सतीश कुमार मूल रूप से शेखपुरा जिले के बरबीघा प्रखंड के सर्वा गांव के निवासी थे। उनका जन्म वर्ष 1948 में हुआ था। वे सामाजिक और राजनीतिक रूप से सक्रिय नेताओं में गिने जाते थे। इस रैली का उद्देश्य कुर्मी समाज की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाना और सामाजिक चेतना को मजबूत करना था। उस समय कुर्मी, कोइरी और अतिपिछड़ा समाज को एक मंच पर लाने का प्रयास किया गया था।

सतीश कुमार ने सबसे पहले शेखपुरा से तत्कालीन विधायक राजो सिंह के खिलाफ चुनाव लड़ा और साल 1990 में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के टिकट पर सूर्यगढ़ा से पहली बार विधायक बने। इसके बाद 1995 में अस्थावां से निर्दलीय विधायक चुने गए। वर्ष 2001 में समता पार्टी से विधायक रहे। साल 2009 में उन्होंने नालंदा से लोक जनशक्ति पार्टी के टिकट पर लोकसभा चुनाव भी लड़ा था, जिसमें वे दूसरे स्थान पर रहे। सतीश कुमार के निधन पर उनके समर्थकों, नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने गहरा शोक व्यक्त किया है। अस्थावां के विधायक डॉ. जितेंद्र कुमार ने कहा कि सतीश बाबू उनके लिए अभिभावक समान थे और समाज के लिए उनका योगदान हमेशा याद किया जाएगा।