छपरा/बिहार
छपरा में 17 साल पुराने हत्या मामले में अदालत ने तीन दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही अर्थदंड की सजा भी सुनाई गई है। मामला वर्ष 2009 में हुए चाकूबाजी और बाद में घायल युवक की मौत से जुड़ा है।

तीन दोषियों को आजीवन कारावास
तीनों दोषियों को आजीवन कारावास की सजा जिला और सत्र न्यायाधीश अष्टम अनिल कुमार भारद्वाज ने छपरा मुफस्सिल थाना कांड संख्या-21/2009 में सुनवाई पूरी करने के बाद यह फैसला लिया है। दोषियों में शामिल खैरा थाना क्षेत्र के खैरा निवासी और वर्तमान में हेमनगर निवासी सुबोध राय, सुधीर राय और वीरेंद्र राय को दोषी करार दिया गया है। अदालत ने तीनों को भादवि की धारा 302/34 के तहत आजीवन कारावास और 20 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषियों को सजा सुनाते हुए यह स्पष्ट किया कि अर्थदंड जमा नहीं करने पर छह माह की अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी।

2009 में रेलवे क्वार्टर को लेकर हुआ था विवाद
दरअसल यह मामला 2009 का है। रेलवे क्वार्टर को लेकर विवाद दो पक्षों में विवाद हुआ था। मामले में सोनपुर थाना क्षेत्र के रहर दियर निवासी और वर्तमान में शिव टोला रामनगर निवासी संजीत कुमार यादव ने पटना के राजेश्वर हॉस्पिटल में जख्मी हालत में बयान दर्ज कराया था। उस दौरान उन्होंने बताया था कि एक फरवरी 2009 की शाम ड्यूटी से घर लौटने के दौरान साढ़ा डाला सेंट्रल बैंक के पास तीनों आरोपियों ने उन्हें घेर लिया और रेलवे क्वार्टर खाली करने के लिए धमकी देने लगा। इस दौरान दोनों पक्षों में झड़प हुई। इसी क्रम में अपराधियों ने चाकू से उनपर हमला कर दिया। घटना के बाद स्थानीय लोगों ने घायल को सदर अस्पताल पहुंचाया, जहां से उन्हें पटना रेफर कर दिया गया। इलाज के दौरान ही उनकी मौत हो गई थी। इसके बाद पुलिस ने 20 जून 2009 को मामले को हत्या में परिवर्तित कर जांच शुरू की थी। अब उसी मामले में तीनों अपराधियों को आजीवन कारावास और 20 हजार का आर्थिक जुर्माना लगाया गया है।