द फॉलोअप,बिहार
सम्राट चौधरी सरकार ने JDU विधायक चेतन आनंद को राज्य स्तरीय कार्यक्रम कार्यान्वयन समिति का सदस्य बनाया है। नई सरकार गठन में बेटे को मंत्री नहीं बनाए जाने से नाराज थे पूर्व सांसद आनंद मोहन। इस समिति में मोकामा विधायक नीलम देवी सहित कई प्रभावशाली नेताओं को जगह मिली है। सभी को उप मंत्री का दर्जा दिया जाएगा। सरकार के इस फैसले के बाद बिहार की राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।

समिति में कुल 12 सदस्यों को मिली जगह
शनिवार को अधिसूचना जारी करते हुए मुख्यमंत्री ने इसकी जानकारी दी है। इस समिति के अध्यक्ष खुद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी होंगे, जबकि डीप्टी सीएम विजय कुमार चौधरी को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया है। समिति के उपाध्यक्ष भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी और जदयू प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा को बनाया गया है। समिति में कुल 12 सदस्यों को जगह दी है। जिसमें चेतन आनंद के अलावा संगीता कुमारी, भरत बिंद, मुरारी प्रसाद गौतम, सिद्धार्थ सौरव, ललन कुमार मंडल, प्रहलाद यादव, जगन्नाथ ठाकुर, राजेश कुमार वर्मा, भारती मेहता और चंदन कुमार सिंह शामिल है। इसके अलावा मोकामा विधायक और बाहुबली नेता अनंत सिंह की पत्नी नीलम देवी को भी समिति में जगह दी गई है। सरकार के इस फैसले के बाद सभी को विधायक, एमएलसी होने के बावजूद उन्हें अतिरिक्त सरकारी सुविधाएं दी जाएंगी। वहीं समिति के उपाध्यक्षों को राज्य मंत्री के बराबर सुविधाएं मिलेंगी। सरकार का कहना है कि समिति में आगे भी जरुरत के अनुसार नियुक्तियां की जा सकती हैं।

कौन हैं चेतन आनंद?
चेतन आनंद मोकामा विधायक आनंद मोहन के बेटे हैं। वर्तमान में चेतन औरंगाबाद जिले के नबीनगर से विधायक हैं। इससे पहले वह RJD में थे, लेकिन 2024 में जेडीयू में शामिल हो गए थे। ऐसी चर्चाएं थी कि बेटे को मंत्री पद नहीं मिलने से आनंद मोहन नाराज थे। उन्होंने एक कार्यक्रम में जेडीयू के कुछ वरिष्ठ नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा था कि पार्टी ‘एक थैली की पार्टी’ बनकर रह गई है। उनके इस बयान के बाद जेडीयू के भीतर भी काफी सियासी हलचल देखने को मिली थी। चेतन आनंद का नाम पूर्व सीएम नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार के साथ भी चर्चा में रहा है। जब नए मंत्रिमंडल में निशांत के मंत्री बनाने को लेकर चर्चा हो रही थी तो ये माना जा रहा था कि चेतन को भी इसमें कोई मंत्री पद दिया जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ था। खैर, अब मुख्यमंत्री के इस फैसले के बाद प्रदेश में चर्चाएं तेज हो गई हैं। राजनीतिज्ञों का मानना है कि पार्टी में संतुलन बनाए रखने के लिए यह फैसला लिया गया है।