पटना
बिहार कांग्रेस ने CARE Ratings की हालिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए आरोप लगाया है कि भाजपा-जेडीयू गठबंधन की सरकार ने बिहार को सामाजिक और आर्थिक रूप से गंभीर पिछड़ेपन की ओर धकेल दिया है। पार्टी ने कहा है कि एक संगठित अभियान के तहत राज्य की अर्थव्यवस्था, विकास, सामाजिक न्याय और सौहार्द को योजनाबद्ध रूप से कमजोर किया गया है। इन दावों के समर्थन में वे रिपोर्टें सार्वजनिक करेंगी, जो या तो स्वयं मोदी सरकार द्वारा अथवा किसी प्रतिष्ठित संस्था द्वारा तैयार की गई हैं। इसी कड़ी में कांग्रेस ने आज CARE Ratings की ‘Social and Economic Development Index’ रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए कहा कि भाजपा-जेडीयू के दो दशक के शासन ने बिहार को देश के बड़े राज्यों में सबसे निचले पायदान पर पहुँचा दिया है।

17 राज्यों में सबसे नीचे बिहार
CARE Ratings द्वारा जारी रिपोर्ट में देश के 17 बड़े राज्यों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति का मूल्यांकन किया गया है, जिसमें बिहार को कुल मिलाकर सबसे निचला स्थान (17वां) प्राप्त हुआ है। रिपोर्ट में शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, अधोसंरचना और आर्थिक गतिविधियों सहित सात प्रमुख स्तंभों और 50 संकेतकों के आधार पर राज्यों की रैंकिंग की गई है। बिहार का कुल स्कोर केवल 34.8 रहा।
1. स्वास्थ्य और शिक्षा में भारी गिरावट
रिपोर्ट के अनुसार:
• बिहार में मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर आज भी चिंताजनक स्तर पर है।
• प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता अन्य राज्यों की तुलना में बेहद कमजोर है।
• रोजगार सृजन और महिला सशक्तिकरण के मोर्चे पर भी राज्य का प्रदर्शन अत्यंत निराशाजनक रहा है।
2. आर्थिक मोर्चे पर भी पिछड़ापन
रिपोर्ट के अनुसार:
• राज्य सरकार द्वारा प्रचारित आर्थिक विकास और निवेश के दावे खोखले साबित हुए हैं।
• औद्योगिक विकास और प्रति व्यक्ति आय के मामले में बिहार राजस्थान, पंजाब और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों से भी पीछे है।
विभिन्न स्तंभों पर बिहार की रैंकिंग:
राजकोषीय स्तंभ (Fiscal Pillar):
• रैंक: 17वां
• राजकोषीय संतुलन, ब्याज भुगतान, ऋण प्रबंधन और देनदारियों के प्रबंधन में बिहार का प्रदर्शन सबसे कमजोर रहा।
अधोसंरचना स्तंभ (Infrastructure Pillar):
• रैंक: 17वां
• प्रति व्यक्ति बिजली उपलब्धता, रेलवे घनत्व, सिंचाई सुविधा, शिक्षक अनुपात और स्वास्थ्य सेवाओं में गंभीर खामियाँ पाई गईं।
वित्तीय विकास स्तंभ (Financial Development Pillar):
• रैंक: 15वां
• बैंकिंग, बीमा, एनबीएफसी और म्यूचुअल फंड जैसी सेवाओं की पहुँच बेहद सीमित रही।
सामाजिक स्तंभ (Social Pillar):
• रैंक: 15वां
• शिक्षा, स्वास्थ्य, मानव विकास और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में स्थिति असंतोषजनक रही।
शासन स्तंभ (Governance Pillar):
• रैंक: 16वां
• न्यायिक दक्षता, ई-सेवाएं और व्यावसायिक माहौल में राज्य पिछड़ा रहा।
• न्यायिक प्रक्रिया की धीमी गति और प्रशासनिक असफलता भी उजागर हुई।
पर्यावरण स्तंभ (Environment Pillar):
• रैंक: 16वां
• वायु गुणवत्ता, वन क्षेत्र और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे पहलुओं में प्रदर्शन बेहद कमजोर रहा।

CARE Ratings की यह रिपोर्ट स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि भाजपा-जेडीयू के लंबे शासनकाल में बिहार न केवल विकास की दौड़ से बाहर हुआ, बल्कि कई मानकों पर देश के सबसे निचले पायदान पर पहुँच गया। यह न केवल सरकार की नाकामी का प्रमाण है, बल्कि भ्रष्टाचार, कुप्रबंधन और जनविरोधी नीतियों का भी परिणाम है।
बिहार कांग्रेस का कहना है कि इस स्थिति से उबरने के लिए सत्ता परिवर्तन और नीतिगत क्रांति अनिवार्य है, जो इंडिया गठबंधन ही ला सकता है। यह जानकारी प्रेमचंद मिश्रा, राष्ट्रीय मीडिया पैनलिस्ट, एआईसीसी एवं पूर्व सदस्य, बिहार विधान परिषद की ओर से साझा की गई है।
