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I Love Mohammed, I Love Mahadev विवाद पर शंकराचार्य का बयान– यह महादेव का अपमान है, ध्यान भटकाने की साजिश

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बेतिया 
'I love Mohammed, I love Mahadev' बयान पर देशभर में छिड़ी बहस के बीच द्वारका-शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इस नारे को 'महादेव का अपमान' बताते हुए कहा कि यह सब जनता का ध्यान असल मुद्दों से भटकाने के लिए किया जा रहा है।
बिहार के बेतिया में मीडिया से बातचीत करते हुए शंकराचार्य ने कहा, "क्या महादेव पूजा का विषय हैं या प्रेम का? ‘I love Mahadev’ कहना महादेव का सम्मान है या उनका अपमान? ये भाषा महादेव के लिए उपयुक्त नहीं है। महादेव को 'प्यार' करने की बात करना एक तरह से उनका अपमान है।" उन्होंने आगे कहा, "मुझे मोहम्मद के बारे में ज़्यादा जानकारी नहीं है। जो उनके अनुयायी हैं, वे बेहतर जानते होंगे। लेकिन 'I love Mohammed, I love Mahadev' जैसे नारे समाज में भ्रम फैलाने वाले हैं और इनका उद्देश्य सिर्फ जनता को असल मुद्दों से भटकाना है।"


विवाद की पृष्ठभूमि:
विवाद की शुरुआत उत्तर प्रदेश के बरेली में 4 सितंबर को ईद मिलादुन्नबी के जुलूस के दौरान हुई। इस जुलूस के मार्ग में "I Love Mohammed" लिखा हुआ एक बोर्ड लगाया गया था, जिसे कुछ स्थानीय हिंदू लोगों ने आपत्तिजनक बताया और विरोध जताया। इसके बाद प्रतिक्रिया स्वरूप “I Love Mahadev” और अन्य हिंदू देवी-देवताओं के समर्थन में भी पोस्टर और नारे सामने आने लगे। बरेली में जुमे की नमाज़ के बाद इस नारे को लेकर प्रदर्शन भी हुआ, जिसमें स्थिति तनावपूर्ण हो गई और पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। जवाब में वाराणसी समेत कई अन्य शहरों में संतों और हिंदू संगठनों ने “I Love Mahadev” अभियान चलाया और हर-हर महादेव के जयकारे लगाए।


 

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