बक्सर/नावानगर
बिहार के बक्सर जिले के नावानगर औद्योगिक क्षेत्र में स्थापित भारत प्लस एथेनॉल लिमिटेड का एथेनॉल प्लांट पिछले कई दिनों से पूरी तरह बंद पड़ा है। प्लांट बंद होने से यहां कार्यरत 300 से अधिक कर्मचारी और मजदूर बेरोजगार हो गए हैं, जिससे इलाके में सामाजिक और आर्थिक संकट गहराता जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, 24 दिसंबर से प्लांट का उत्पादन ठप है। इसका मुख्य कारण राज्य स्तर पर एथेनॉल सप्लाई ऑर्डर में करीब 50 प्रतिशत की कटौती बताया जा रहा है। कंपनी प्रबंधन का कहना है कि आधी क्षमता के साथ प्लांट चलाना व्यावहारिक नहीं है, इसलिए उत्पादन रोकना पड़ा।
प्लांट प्रबंधन के मुताबिक, यह इकाई प्रतिदिन लगभग एक लाख लीटर एथेनॉल उत्पादन करने की क्षमता रखती है, जबकि मासिक क्षमता करीब 30 लाख लीटर है। लेकिन नई व्यवस्था के बाद कंपनी को केवल 14 लाख लीटर प्रतिमाह उत्पादन की अनुमति मिल पा रही है, जिससे संचालन लागत भी नहीं निकल पा रही।

कंपनी ने स्पष्ट किया है कि मौजूदा हालात में पूरे जनवरी महीने उत्पादन शुरू होने की संभावना नहीं है। अगर स्थितियां अनुकूल रहीं तो फरवरी से दोबारा उत्पादन शुरू किया जा सकता है, लेकिन यदि नीति में बदलाव नहीं हुआ तो प्लांट को लंबे समय तक बंद रखने की नौबत आ सकती है।
यह एथेनॉल प्लांट अनाज आधारित है, जिससे आसपास के किसानों को मक्का और अन्य फसलों की बिक्री का एक स्थायी बाजार मिला हुआ था। प्लांट बंद होने से अब किसानों को भी भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है और स्थानीय कृषि अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ रहा है। उल्लेखनीय है कि यह संकट केवल एक प्लांट तक सीमित नहीं है। बिहार में अनाज आधारित 14 सहित कुल 22 एथेनॉल इकाइयाँ इसी तरह की नीति संबंधी दिक्कतों से जूझ रही हैं। इससे राज्य के औद्योगिक निवेश माहौल और रोजगार सृजन पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
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मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद भी नहीं मिला समाधान
कुछ दिन पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बक्सर स्थित इस एथेनॉल प्लांट का निरीक्षण किया था। उस दौरान कर्मचारियों और प्रबंधन की ओर से रोजगार और उत्पादन से जुड़ी समस्याओं को उनके सामने रखा गया था। कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपकर समाधान की मांग की थी और सकारात्मक आश्वासन भी मिला था। हालांकि, निरीक्षण और आश्वासन के बावजूद सप्लाई कटौती लागू होने से प्लांट बंद हो गया, जिससे कामगारों में गहरा असंतोष है। अब कर्मचारी, किसान और स्थानीय व्यवसायी सरकार से तत्काल हस्तक्षेप और नीति में बदलाव की मांग कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो बक्सर क्षेत्र में बेरोजगारी और पलायन की समस्या और गंभीर हो सकती है।
