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झारखंड संघर्ष, स्वाभिमान और सांस्कृतिक अस्मिता की भूमिः रबींद्र नाथ महतो

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द फॉलोअप डेस्क
विधानसभा अध्यक्ष रबींद्र नाथ महतो ने कहा कि 15 नवंबर 2000 से जिस सफर की शुरूआत हुई थी वह आज 25 वर्षों का हो चुका है। 15 नवंबर 2000 को झारखण्ड को न केवल प्रशासनिक पहचान मिली थी बल्कि हमारी संस्कृति और अस्मिता की छाप और प्रबल हुई थी। हमें राजनीतिक संबल मिला था। झारखण्ड मात्र एक पृथक भौगोलिक भूखण्ड ही नहीं है बल्कि भूमंडल के निर्माण का साक्षी होने के साथ-साथ प्रागऎतिहासिक काल से मानव सभ्यता के विकास एवं उद्भव का सहचर रहा है। झारखण्ड का इतिहास अनेको झंझावातों से गुजरता रहा है। प्रारंभ में केन्द्रीय शासकों की हीरे की चाह, कालांतर में भूमि और संसाधनों पर नियंत्रण, जंगलों पर कब्जा और इस उद्येश्य से सांस्कृतिक उपेक्षा और शोषण औपनिवेशिक शासन के बाद भी दशकों तक उपेक्षा, शोषण और संसाधनों के दोहन का आघात और इन सबके बीच प्रतिरोध की आवाज और बलिदान की होड़ में झारखण्ड की गाथा लिखी है। संथाल हूल से बिरसा की क्रांति और बाद में टाना भगतों के तप और दिशोम गुरु शिबू सोरेन के साहस और बलिदान ने झारखण्ड की परिकल्पना को साकार किया है। स्पीकर झारखंड विधानसभा की 25 वीं वर्षगांठ पर आयोजित समारोह को संबोधित कर रहे थे।


झारखंड-संघर्ष, स्वाभिमान और सांस्कृतिक अस्मिता की भूमि
स्पीकर ने कहा कि झारखण्ड वह राज्य है, जहाँ संस्कृति, संघर्ष और सामूहिक आत्मा का समन्वय सदियों से होता आया है। हमारे पर्व-सरहुल, करम, सोहराय हमारी परंपराएँ-जल, जंगल और जमीन के साथ जीवन का गहरा रिश्ता। ये सब मिलकर झारखंडी पहचान को अक्षुण्ण बनाए हुए हैं। इस पावन धरती ने ऐसी विभूतियाँ जन्म दीं, जिनके व्यक्तित्व और विचारों ने पूरे भारत को दिशा दी- भगवान बिरसा मुंडा, सिद्धों-कान्हों, फूलो-झानो, तिलका मांझी, नीलाम्बर-पीताम्बर, शेख भिखारी, गणपत राय, टिकैत उमराव सिंह और अनेक अन्य जननायक, जिनकी चेतना आज भी जनमानस में धड़कती है। झारखंड का इतिहास बताता है कि यहाँ का संघर्ष सिर्फ राजनीतिक नहीं था बल्कि सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक समानता के लिए एक सतत पुकार थी। सबको साथ लेकर चलने की इसी सोच ने झारखंड राज्य आंदोलन को एक जन-आंदोलन का स्वरूप दिया। आज के इस पावन दिवस पर, झारखंड आंदोलन के महानायक, जन-जन के नेता और झारखंड की आत्मा के वाहक दिशोम गुरु शिबू सोरेन का मैं आदरपूर्वक स्मरण करना चाहता हूँ। दिशोम गुरु को केवल एक राजनेता कहना उनके विराट व्यक्तित्व और योगदान का संकुचन होगा। 


अगली 25 साल की यात्रा कैसी हो?
शिक्षा ऐसी हो जो हमारे बच्चों को विश्वस्तरीय ज्ञान दे। स्वास्थ्य ऐसा हो जो दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों तक समान पहुँच बनाए। रोजगार ऐसे हों जो युवाओं को समान अवसर दें। जनजातीय सांस्कृतिक संरक्षण ऐसा हो जो हमारी पहचान को और मजबूत करे। पर्यावरण संरक्षण ऐसा हो जो आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित प्रकृति दे। सड़क, उद्योग, IT, कृषि, सभी क्षेत्रों में ऐसा समन्वय हो कि झारखंड राष्ट्रीय ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक मॉडल राज्य के रूप में उभरे। हम इस विधानसभा से यही संदेश देते हैं- हम राजनीति से ऊपर उठकर नीति को प्राथमिकता देंगे। हम दल से ऊपर उठकर राज्य के हित को प्राथमिकता देंगे और हम व्यक्तिगत मतभेदों से ऊपर उठकर सामूहिक लक्ष्य को प्राथमिकता देंगे।


 

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