द फॉलोअप डेस्क
देशभर में जन्माष्टमी धूमधाम के साथ मनाई जा रही है। हजारीबाग का इचाक गांव भी इस उत्सव से अछूता नहीं है। यहां स्थित लगभग 300 वर्ष पुराना बंशीधर मंदिर आस्था का बड़ा केंद्र है। रामगढ़ राजघराने से जुड़ा यह मंदिर आज भी लोगों की आस्था का प्रतीक बना हुआ है।.jpeg)
हजारीबाग का इचाक जिसे मंदिरों का गांव कहा जाता है, यहीं पर है ऐतिहासिक बंशीधर मंदिर। 1761 में रामगढ़ राजा विश्वनाथ सिंह के मंत्री कनी बरगाह ने घनघोर जंगलों के बीच इस मंदिर का निर्माण कराया था। कहा जाता है कि जन्माष्टमी की रात यहां बांसुरी की मधुर धुन गूंज उठती थी।
जन्माष्टमी के अवसर पर यहां कृष्ण उत्सव मनाने की परंपरा पिछले 300 वर्षों से चली आ रही है। यहां श्रद्धा और विश्वास के साथ मांगी गई हर मनोकामना पूरी होती है।.jpg)
स्थानीय मान्यता है कि रामगढ़ राजा बंशीधर की मूर्ति को पदमा किला ले जाना चाहते थे। लेकिन जैसे ही मूर्ति को हाथी पर रखा गया, हाथी वहीं बैठ गया। घंटों तक यही स्थिति बनी रही। इसके बाद राजा ने आदेश दिया कि बंशीधर इचाक में ही रहेंगे।.jpeg)
पूर्वज बताते थे कि बंशीधर को पदमा किला ले जाने की कोशिश हुई, लेकिन भगवान इचाक से जाना ही नहीं चाहते थे। तभी से यह मंदिर यहां आस्था का प्रतीक बन गया।”
आज यह मंदिर ऐतिहासिक महत्व और आस्था का केंद्र होने के बावजूद रखरखाव के अभाव में खंडहर बनता जा रहा है। जरूरत है कि सरकार और प्रशासन इस धरोहर को संरक्षित करे।
300 साल पुराना बंशीधर मंदिर न सिर्फ आस्था का केंद्र है बल्कि झारखंड की ऐतिहासिक धरोहर भी है। जन्माष्टमी पर यहां दूर-दराज से आए श्रद्धालु परंपरा और विश्वास को जीवित रखे हुए हैं।