द फॉलोअप डेस्क
झारखंड में शराब के कारोबार में व्याप्त भ्रष्टाचार पर नकेल पड़ते ही उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग के राजस्व में अप्रत्याशित जंप आया है। अब तक राज्य में शराब से सर्वाधिक 2700 करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ था। लेकिन समाप्त हुए वित्तीय वर्ष 2025-26 में विभाग को रिकार्ड 4013.53 करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ है। यह विभाग के लिए नया कीर्तिमान है। मालूम हो कि राज्य के शराब कारोबार में भ्रष्टाचार के आरोप में तत्कालीन उत्पाद सचिव विनय चौबे व अन्य आईएएस अधिकारियों के अलावा आधा दर्जन से अधिक आपूर्तिकर्ता और मैन पावर एजेंसी के अधिकारियों को जेल जाना पड़ा। एसीबी अभी भी पूर्व में हुए घोटाले की जांच कर रही है और इसका दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। लेकिन खुदरा शराब व्यवसाय को निजी हाथों में सौंपने और प्रशासनिक तंत्र की मजबूती के बाद भ्रष्टाचार पर अंकुश लगता दिखायी पड़ रहा है। इसी का परिणाम है कि पूर्व की तुलना में राजस्व में लगभग 50 फीसदी की अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। जबकि किसी व्यवसाय और व्यपार में अमूमन 10 फीसदी की सामान्य बढोत्तरी होती है।

विभाग का कहना है कि यह उपलब्धि न केवल वित्तीय दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि प्रशासनिक दक्षता और सख्त निगरानी तंत्र का भी प्रमाण है। विभाग द्वारा अवैध शराब के निर्माण, परिवहन और बिक्री पर कड़ी कार्रवाई, लाइसेंसिंग प्रक्रिया में पारदर्शिता और तकनीकी सुधारों के कारण यह ऐतिहासिक वृद्धि संभव हो सकी है। राजस्व वृद्धि के प्रमुख कारण इस अभूतपूर्व राजस्व वृद्धि के पीछे कई अहम कारण रहे हैं। विभाग ने डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम को मजबूत किया, जिससे शराब की आपूर्ति और बिक्री पर निगरानी अधिक प्रभावी हुई। इसके साथ ही अवैध कारोबार के खिलाफ लगातार अभियान चलाए गए, जिससे राजस्व में रिसाव पर रोक लगी। इसके अलावा, नई उत्पाद नीति के तहत लाइसेंस शुल्क और उत्पाद शुल्क में किए गए संशोधनों ने भी राजस्व संग्रह में अहम भूमिका निभाई। राज्य में शराब दुकानों के संचालन में पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा बढ़ने से भी आय में इजाफा हुआ है।
