द फॉलोअप टीम, दिल्ली:
टोक्यो ओलंपिक्स 2020 की रजत पदक विजेता मीराबाई चानू भारत लौट आई हैं। मीराबाई चानू ने 24 जुलाई को टोक्यो ओलंपिक्स में 49 किलोग्राम वेटलिफ्टिंग प्रतिस्पर्धा का सिल्वर मेडल जीता था। मीराबाई चानू सोमवार को दोपहर बाद जब दिल्ली एयरपोर्ट पर पहुंची तो उनका जोरदार स्वागत हुआ। दिल्ली एयरपोर्ट पर लोगों ने वंदे मातरम और भारत माता की जय के नारे लगाए। कोरोना महामारी की वजह से कम लोग थे लेकिन उत्साह में कमी नहीं थी।

दिल्ली एयरपोर्ट पर मीराबाई चानू का कोरोना टेस्ट
दिल्ली एयरपोर्ट पर पहुंचते ही मीराबाई चानू को कोविड टेस्ट किया गया जो कि प्रोटोकॉल के मुताबिक जरूरी था। मीराबाई चानू ने वापस आने के बाद समाचार एजेंसी एएनआई से कहा कि मेरे लिए ये काफी चुनौतीपूर्ण था। मेरा और कोच सर का सपना था कि हम ओलंपिक में मेडल जीतें। रियो ओलंपिक में मेरा मेडल चूक गया था। उसके बाद हमने काफी मेहनत की। रियो ओलंपिक की हार से मैंने काफी कुछ सीखा था। इस बार रणनीति में बदलाव किया था।

मीराबाई चानू ने टोक्यो ओलंपिक में पदक का खाता खोला
गौरतलब है कि मीराबाई चानू ने ही टोक्यो ओलंपिक्स में भारत के लिए पदकों का खाता खोला। टोक्यो ओलंपिक्स के दूसरे ही दिन मीराबाई चानू ने 49 किलोग्राम भारवर्ग में कुल 202 किलोग्राम का वजन उठाकर रजत पदक जीता था। इस स्पर्धा का स्वर्ण पदक चीनी एथलीट ने जीता जबकि कांस्य पदक इंडोनेशिया की एथलीट ने जीता। इस बीच मिली जानकारी के मुताबिक मीराबाई चानू को मणिपुर सरकार ने पुलिस विभाग में एडिशनल सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस नियुक्त करने का फैसला किया है। इसकी घोषणा मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने की।

मणिपुर के सुदूरवर्ती गांव में रहती थीं मीराबाई चानू
गौरतलब है कि मणिपुर की राजधानी इंफाल से 60 किमी दूर सुदूरवर्ती ग्रामीण इलाके में रहने वाली मीराबाई चानू बचपन में अपनी बड़ी बहन के साथ जलावन की लकड़ियां बीनने का काम करती थीं। शायद उनमें नैसर्गिक प्रतिभा थी जिसकी वजह से वो भारी से भारी गट्ठर भी आसानी से उठा लेती थीं। हालांकि उनका वेटलिफ्टर बनने का कोई इरादा नहीं था। मीराबाई बचपन में तीरंदाज बनना चाहती थीं। 8वीं कक्षा में एक वेटलिफ्टर की कहानी पढ़कर उनको प्रेरणा मिली और फिर उन्होंने इसी दिशा में आगे बढ़ने का सोचा। अब ओलंपिक का खिताब भी जीत लिया।

ग्लासगो कॉमनवेल्थ से मीराबाई ने किया था आगाज
मीराबाई चानू पहली बार साल 2014 के ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में नोटिस की गई थीं जब उन्होंने रजत पदक जीता था। 2016 के रियो ओलंपिक्स ट्रायल्स में मीराबाई ने राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ दिया था। उनको रियो में प्रबल दावेदार माना जा रहा था लेकिन वो वहां क्लीन एंड जर्क के अपने तीन प्रयास में कोई वजन नहीं उठा सकीं। मीराबाई की काफी आलोचना हुई। इसका जवाब उन्होंने 2017 में दिया जब वर्ल्ड वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में मीराबाई ने स्वर्ण पदक जीत लिया। फिर 2018 के कॉमनवेल्थ गेम्स में मीराबाई चानू ने स्वर्ण पदक जीता।