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मैं मोजे और ट्राउजर्स गिनने के लिए पैदा नहीं हुआ हूं, मैं फौजी बनने के लिए आया हूं...पढ़िए! मेजर विवेक गुप्ता की शौर्य गाथा

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द फॉलोअप टीम, दिल्ली:

26 जुलाई, 1999 का दिन भारतीय इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में अंकित है। इसी दिन भारतीय सेना को पाकिस्तानी घुसपैठियों पर जीत मिली थी। आज ऑपरेशन विजय की 22वीं वर्षगांठ है। आज का दिन शहीदों को समर्पित है। कई शहीदों में एक अदम्य शौर्य और साहस का परिचय है मेजर विवेक गुप्ता। 

कारगिल के योद्धा विवेक गुप्ता की कहानी
मेजर विवेक गुप्ता भी कारगिल युद्ध में शहीद हुए। वह 1970 में देहरादून में जन्मे थे। उनके पिता कर्नल बीआरएस गुप्ता फौज में थे। उन्होंने 11 जून, 1999 को तोलोलिंग चोटी पर हमलों के दौरान दुश्मनों के कई ठिकानों पर कब्जा कर लिया था। उन्हें महावीर चक्र से भी नवाजा गया। मेजर विवेक गुप्ता ने कहा था ‘मैं मोजे और ट्राउजर्स गिनने के लिए पैदा नहीं हुआ हूं। मैं फौजी बनने के लिए आया हूं और सरहदों की रक्षा के लिए जान भी कुर्बान करनी पड़ी तो पीछे नहीं हटूंगा।

दो गोलियां खाकर भी लड़ते रहे थे विवेक गुप्ता
पाकिस्तान ने कारगिल युद्ध के वक़्त तोलोलिंग की चोटी जम गए थे तब देश के लिए बहुत बड़ी चुनौती उन्हें यहां से खदेड़ने की। यह आसान नहीं था। हमारे पास विक्रम बत्रा और विवेक गुप्ता जैसे जांबाज और साहसी जवान थे। परमवीर सिपाही विवेक गुप्ता राजपूताना राष्ट्रीय रायफल्स में थे। उन्हें ऑर्डर मिला था कि दुश्मनों को बाहर निकाल चोटी पर अपनी पकड़ बनानी है। मेजर विवेक गुप्ता युद्ध में अगुवाई कर रहे थे। वहां उन्होंने अदम्य साहस का परिचय दिया। घुसपैठियों को परास्त किया। घुसपैठियों के साथ झड़प में 2 गोलियां भी लगी लेकिन हार नहीं माने। 3 दुश्मनों को अपने हाथ से मौत के घाट उतारा।  उन्हें मारकर उन्होंने  बंकर पर अपना वर्चस्व कायम कर तिरंगा फहराया।

13 जून को शहीद हुए थे मेजर विवेक गुप्ता
13 जून 1999 को  विवेक गुप्ता शहीद हो गये। अपनी अंतिम सांस तक उन्होंने दुश्मनों को धूल चटाया। शहीद होने के बाद उनके अदम्य साहस के लिए महावीर चक्र से सम्मानित किया गया। उन्हीं दिनों क्रिकेट विश्वकप भी चल रहा था। नाजुक हालातों के बीच जब कारगिल शहीद मेजर विवेक गुप्ता का शव दिल्ली पहुंचा तो पूर्व कप्तान कपिल देव अपने आंसुओं को नहीं रोक पाए। वो पेपर में शहीदों को फोटो देखकर रो पड़े थे। उन्होंने सरकार से यह बात कही थी कि पाकिस्तान के साथ कोई क्रिकेट नहीं खेलना।