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किसानों को लेकर राजनीतिक नौटंकी कर रही BJP, नाकामी छिपाने के लिए खेतों में गए नेता- सुप्रियो भट्टाचार्य

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द फॉलोअप टीम, रांची: 

झारखंड में शुक्रवार को धान क्रय भुगतान को लेकर सियासी गहमा-गहमी का माहौल दिखा। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश सहित तमाम बड़े नेता और कार्यकर्ताओं ने प्रत्येक जिले में खेतों में जाकर धरना दिया और धान क्रय की राशि का अविलंब भुगतान करने की मांग की। इस घटनाक्रम पर अब झारखंड मुक्ति मोर्चा का की प्रतिक्रिया सामने आई है। झारखंड मुक्ति मोर्चा के राष्ट्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने मामले में प्रेस वार्ता आयोजित की। 

बीजेपी के धरना प्रदर्शन को बताया राजनीतिक नौटंकी
सुप्रियो भट्टाचार्य ने बीजेपी के धरना प्रदर्शन राजनीतिक नौटंकी कहा। सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी के नेता और कार्यकर्ता खेतों में नजर आये। जो कृषि को कॉरपोरेटे के हाथों सौंपने का काम करते हैं उसी पार्टी के नेताओं द्वारा अजीबो-गरीब राजनीतिक गतिविधि की गई। बीजेपी भूल गई है कि आज से डेढ़ साल बीजेपी पांच साल तक सत्ता में थी। पांच वर्षों के सत्ता साल और केंद्र के सात साल के कार्यकाल में किसान और किसानी को लेकर जैसी नीतियां तय की गई उसमें किसान कहीं नहीं हैं। 

किसान आंदोलन को लेकर बीजेपी पर साधा निशाना
सुप्रियो भट्टाचार्य ने बीजेपी पर किसान आंदोलन को लेकर निशाना साधा। कहा कि बीजेपी की नई नीति में किसान की जगह कॉरपोरेट जगत है। हम जानते हैं कि देश भर के अन्नदाताओं का आंदोलन नौ महीने से दिल्ली से महज 20 किमी दूर हो रहा है। दिल्ली के सीमाई इलाकों में आंदोलन जारी है। केंद्र द्वारा जबरन पास किए गए डेथ वारंट जिसमें किसानों की जमीन समाप्त करना, उनकी भूमि पर रईसों का कब्जा करना और अनाज पर कब्जा स्थापित करने वाले कानून का लोगों द्वारा विरोध किया गया। इस कानून ने किसानों को कहीं का नहीं छोड़ा। 

झामुमो ने नए कृषि कानून को बताया तीन डेथ वारंट
सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि केंद्र द्वारा नया कृषि कानून लोकसभा में 17 सिंतबर 2020 को और राज्यसभा ने 20 सितंबर 2020 को लागू किया। भारतीय जनता पार्टी के लोग आज मुंह छुपाने के लिए खेतों में जा रहे हैं। उन्होंने पूर्ववर्ती बीजेपी कार्यकाल पर निशाना साधते हुए कहा कि 2017-2018 के खरीद काल में राज्य सरकार ने 40 लाख क्विंटल धान खरीदने का लक्ष्य निर्धारित किया जिसके एवज में 2017-2018 में केवल 21 लाख क्विंटल धान की खरीद वहीं 2018-19 में केवल 22 लाख क्विंटल धान खरीदा। उन्होंने कहा कि तात्कालीन रघुवर सरकार केवल 53 फीसदी ही धान खरीद कर पाई जबकि हमारी सरकार ने 2020-21 में 24 जिलों को 2 हिस्सों में बांटा। 

सुप्रियो भट्टाचार्य ने धान खरीद स्कीम की तारीफ की
उन्होंने बताया कि तीन जिले चतरा, पलामू और गढ़वा में एफसीआई के माध्यम से खरीद क़ी गई जिसमें 16 लाख क्विंटल खरीद का लक्ष्य तय किया गया जिसके एवज में 16 लाख 40 हजार 682 क्विंटल की धान खरीद की। बाकी 21 जिलों में 44 लाख 85 हजार क्विंटल धान खरीद का लक्ष्य तय किया गया वहां 46 लाख 1 हजार 40 क्विंटल धान की खरीद की। 102 फीसदी से ज्यादा लक्ष्य हासिल किया। जेएफसी के माध्यम से धान की खरीद की गई। ये प्रयास किया गया। 

किसानों को बकाया राशि का भुगतान जल्द होगा
सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि धान क्रय की प्रक्रिया में किसानों से धान लेने के बाद जेएफसी और एफसीआई के जरिए भुगतान विभिन्न तरीकों से किया जाता है। हमारी सरकार ने अभी तक लगभग 70 फीसदी राशि का भुगतान किया है। शेष 30 फीसदी में एफसीआई को 180 करोड़ रुपये देना है वहीं हमें 55 करोड़ रुपये का जुगाड़ करना है। इसका इंतजाम जैसे ही किया जायेगा किसानों को राशि का भुगतान किया जायेगा। 24 जिलों से किसी भी किसान ने राशि भुगतान को लेकर शिकायत नहीं की। बीजेपी को नौटंकी करना था इसलिए खेत में उतर गई। यही विडंबना है। सुप्रिया भट्टाचार्य ने बीजेपी शासित राज्यों पर धान क्रय को लेकर निशाना साधा। कहा कि बिहार में धान क्रय नहीं किया गया। थोड़ा बहुत एफसीआई ने धान क्रय किया लेकिन भुगतान नहीं किया। 

यूपी में किसानों को क्रय राशि का भुगतान नहीं हुआ
सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि यूपी में खरीफ और रबी की खरीद का बीते 4 वर्षों में किसी भी खरीद का भुगतान नहीं किया गया। किसान आंदोलन कर रहे हैं लेकिन नौटंकी यहां की जा रही है। बीजेपी के 16 सांसदों को यहां खेतों में जाकर सिंघु सीमा में जाना चाहिए था और किसानों से कहना चाहिए था कि हम मामले की मध्यस्थता करना चाहते हैं। पिछले वर्ष जून महीने में अध्यादेश के माध्यम से कानून लाया गया था तब हमने कहा था कि तीनों कृषि कानून देश के किसानों के खिलाफ है। 20 लाख रूपये का पैकेज में फाइनेंस बिल के बतौर लागू किया गया था। तभी हमें अंदेशा लगा लिया था कि किसानों के साथ क्या होने वाला है। 


किसानों का कृषि ऋण माफ करने को प्रतिबद्ध सरकार
झामुमो के राष्ट्रीय महासचिव ने कहा कि हेमंत सरकार किसानों का ऋण माफ करने को लेकर कृतसंकल्प है। हमने इसमें 10 लाख किसानों की पहचान की। छह लाख किसानों को बैंक के साथ जोड़कर कृषि ऋण माफ किया। बीजेपी कार्यकाल में व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त थी। पिछली सरकार में धान की खरीद के बाद कई हजार क्विंटल धान जमशेदपुर के मरीन ड्राइव में फेंक दिया गया। किसानों को उसकी कीमत नहीं चुकाई गई। किसानों को उनकी पारिश्रामिक या क्रय मूल्य का भुगतान नहीं किया। 


हेमंत सरकार में प्रति क्विंटल पारिश्रमिक बढ़ाया गया
सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि रघुवर सरकार में किसानों को प्रति क्विंटल पारिश्रामिक 1400 रुपये थी जिसे हमने 1640 रुपये प्रति क्विंटल किया। किसानों का राज्य के सकल घरेलु उत्पाद में 20 फीसदी योगदान सुनिश्चित किया। समय से पहले धान का बीज प्रत्येक जिले में पहुंचाया गया। उवर्रक पहुंचाया गया। किसान खुशहाल है। बीजेपी अपनी नाकामी छुपाने के लिए सड़क पर आ गयी है। राज्य सरकार का स्वास्थ्य, जनस्वास्थ्य, जीविकौोपार्जन औऱ किसानी पर पूरा ध्यान है। हमारी सरकार का ये मुख्य 4 लक्ष्य है। इस लक्ष्य और सफलता से घबरा कर बीजेपी ऐसा काम कर रही है।