द फॉलोअप टीम, रांची:
वो जुमलों की दुकां लेकर सरे बाजार बैठा है, तिजारत के लिए हाकिम मेरा तैयार बैठा है।
कभी जिसने भला सोचा नहीं अपने कबीले का, अजब है माजरा बनके वही सरदार बैठा है।।
यह अशआर प्रवीण परिमल के हैं। ताजा कविता संग्रह 'प्रेम का रंग नीला' के कारण इन दिनों वो चर्चा में हैं। हालांकि इससे पहले तुममें साकार होता मैं (1985) और रावण ऐसे नहीं मरेगा (2001) कविता और गीत संग्रह आ चुके हैं। वहीं गजलों का संकलन तुम्हाररी यादों में अक्स जल्द प्रकाशित होने वाला है।
'प्रेम का रंग नीला' का लोकार्पण
'प्रेम का रंग नीला' के लोकार्पण अवसर पर वरिष्ठस समीक्षक डॉ रवि भूषण ने कहा कि आज हम जिस दौर में रह रहे हैं, प्रवीण परिमल की प्रेम कविताएं हमें आश्वस्त करती हैं कि प्रेम अभी मरा नहीं है। डॉ रामदयाल मुंडा जनजातीय शोध संस्थान के सभागार में आयोजन प्रगतिशील लेखक संघ, रांची ने किया था। जिसकी अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ साहित्यसकार डॉ अशोक प्रियदर्शी बोले कि प्रेम मनुष्य के लिए आवश्यक वस्तु है। परिमल अगली पीढ़ी के लिए उदाहरण प्रस्तुत करते नजर आते हैं।
उम्मीद जगाते नजर आते हैं परिमल
कवि-लेखक रणेंद्र ने कहा कि प्रेम पर कविताएं कई वरिष्ठ कवियों ने लिखी हैं। उनसे तुलना की जाए तो प्रवीण परिमल एक उम्मीद जगाते नजर आते हैं। वरिष्ठम लेखक महादेव टोप्पो ने कहा कि इन कविताओं का स्वागत होना चाहिए। कवि निलोत्पल रमेश ने कहा कि प्रवीण परिमल ने प्रेम को कई कोणों से जानने समझने का प्रयास किया है। यहां विशुद्ध प्रेम दिखाई पड़ता है।
प्रेम को कविताओं का विषय बनाना चुनौतीपूर्ण
कथाकार पंकज मित्र ने कहा कि जीने के लिए कई जरूरी चीजों में से प्रेम एक अहम वस्तु है। प्रवीण परिमल ने प्रेम जैसी वस्तु को अपनी कविताओं का विषय बना कर चुनौतीपूर्ण कार्य किया है। डॉ मिथिलेश ने कहा कि प्रेम मनुष्य को आदमी बनाता है और कविताएं आदमी को इंसान।
संग्रह से कविताओं का पाठ भी हुआ
समारोह के शुरुआत में नीरज नीर, प्रणव प्रियदर्शी और सरोज कांत झा ने संकलन से कविताओं का पाठ किया। संचालन डॉ प्रज्ञा गुप्ता ने किया। आभार वक्तव्य में कवि प्रवीण परिमल ने कहा कि प्रेम मनुष्य के लिए प्रज्ज्वलित दीप है। चेतना में अविरल बहता हुआ प्रेम-अमृत हमें मनुष्य बनाता है।
अंत में...
सच परिमल मोहब्बत के कवि-शायर हैं। खबर का अंत उनके ही शेर के साथ:
हटाकर नफरतों का आज हम दीवार से नक़्शा
चलो कोई मुहब्बत का कलेंडर टाँग देते हैं।