logo

कभी सिर पर था 6 लाख का लोन..अब हैं करोड़ों की कंपनी की मालकिन, जानिए! भारती सुमेरिया के संघर्ष की कहानी

11205news.jpg

द फॉलोअप टीम, मुंबई:

घर में हर दिन पति पत्नी के बीच विवाद होता रहता है लेकिन कभी-कभी यह छोटा विवाद विकराल रूप ले लेता है। यह छोटा विवाद भी घरेलु हिंसा में तब्दील हो जाता है। घरेलु हिंसा में आम तौर पर महिलाएं ही पिसती हैं।  उनके साथ शारीरिक और मानसिक दोनों तरह की प्रताड़ना की जाती है। इससे कुछ औरतें सहन कर लेती हैं, कुछ आत्महत्या कर लेती हैं तो कुछ खुद को इतना आत्मनिर्भर बना लेती हैं कि फिर उनके पति की उनको आंख उठाकर देखने की हिम्मत नहीं होती। उन्ही महिलाओं में से एक मिसाल है भारती। जिनके बच्चे उनकी ताकत बनें। 

 

हर दिन पति प्रताड़ित करते थे 
भारती  सुमेरिया  का जन्म मुम्बई के भिवांडी के एक मध्यम वर्गीय परिवार में हुआ था। दसवीं के बाद पिता ने उन्हें आगे नहीं पढ़ाया। कम उम्र में ही उनकी शादी कर दी ताकि वह ख़ुशी से रह सकें। भारती के पिता को यह शक पहले से था कि वो लड़का उनकी बेटी के लिए एक बुरा सपना बन सकता है। शादी के कुछ ही समय बाद भारती ने एक लड़की को जन्म दिया और कुछ सालों बाद उनके दो जुड़वे बेटे हुए। पति बेरोज़गार था। भारती के पति संजय, भारती को पीटा करते थे। समय बीतते-बीतते वह और अधिक वहशी बन गया। लेकिन यह मारपीट का सिलसिला रोज होने वाली घटना बन गई। इस कारण भारती को  कई बार हॉस्पिटल में एडमिट भी होना पड़ा। 

माता-पिता के घर आ गई 
भारती  जीवन से तंग होकर अपने माता-पिता के घर चली आयीं। यहां भी उनका हर एक पल पति के डर के साये में बीतता था। एक महीने तक वह घर से बाहर भी नहीं निकली थी और ना ही किसी से बात किया। इस अंधेरे जीवन में सिर्फ उनके बच्चे ही उनकी आशा के  किरण थे। बच्चे हमेशा उनका हौसला बढ़ाते था। मां को डिप्रेशन से निकालने के लिए प्रयास करते रहते थे।  उनके भाई ने बच्चों के ख़ातिर उन्हें नौकरी करने को कहा। इस पर भारती ने 2005 में एक छोटी सी फैक्ट्री खोली जिसमें टूथब्रश, बॉक्सेस, टिफ़िन बॉक्सेस आदि बनते थे। भारती की मदद के लिए उनके पिता ने छह लाख का लोन लिया और  दो कर्मचारियों के भर्ती भी की गयी। काम की वजह से भारती का डिप्रेशन खत्म हो गया। 

 

अब 4 करोड़ का है टर्न ओवर 
तीन-चार साल बाद भारती ने एक पीईटी नामक फैक्ट्री खोली जिसमें  प्लास्टिक बॉटल्स बनाये जाते हैं। वह खुद ही सामान की गुणवत्ता की जांच करती थी। धीरे-धीरे कर उन्हें जल्द ही सिप्ला, बिसलेरी जैसे बड़े ब्रांड से भी आर्डर मिलने लगे। 2014 में उनके पति संजय ने फिर से उन पर हाथ उठाया। इस बार उसने फैक्ट्री के कर्मचारियों के सामने ही भारती को मारा। उनके बच्चों को यह बर्दाश्त नहीं हुआ। बच्चों ने पिता से कह दिया कि वह वापस कभी लौटकर उनकी मां के पास न आये। आज भारती ने अपना बिज़नेस बढ़ाकर चार फैक्ट्री में तब्दील कर दिया है जिसका वार्षिक टर्न-ओवर लगभग चार करोड़ है।