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झारखंड में किसानों से इस दर पर खरीदा जा रहा है धान, कृषि और वित्त मंत्री ने की शुरुआत

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द फॉलोअप टीम, रांची: 

झारखंड सरकार के वित्त सह खाद्य आपूर्ति मंत्री डॉ रामेश्वर उरांव एवं कृषि पशुपालन सहकारिता मंत्री बादल पत्रलेख के ने बुधवार को  खरीफ विपणन मौसम 2021-22 के दौरान किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान अभिप्राप्ति की शुरुआत रांची जिला के नामकुम प्रखण्ड अन्तर्गत लैम्पस से की।  इसी के साथ राज्य के सभी 24 जिलों में 562 सेंटर पर धान अभिप्राप्ति की शुरूआत हो गई। इस वर्ष किसानों से 8 लाख मैट्रिक टन धान क्रय का लक्ष्य रखा गया है। गौरतलब है कि इसकी जानकारी पहले भी दी गई थी।

कृषि मंत्री और वित्त मंत्री ने किया विधिवत उद्घाटन
गौरतलब है कि धान अभिप्राप्ति के पूर्व भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर एवं दीप प्रज्ज्वलित कर मंत्री डॉ. रामेश्वर उरांव एवं बादल पत्रलेख ने योजना का विधिवत उद्घाघाटन किया। इस मौके पर विभागीय अधिकारी मृत्युंजय वर्णवाल,यतीन्द्र प्रसाद, प्रभात कुमार, सतीश चौधरी, प्रदेश कांग्रेस कमिटी के वरिष्ठ नेता आलोक कुमार दूबे,लाल किशोर नाथ शाहदेव, डा.राजेश गुप्ता छोटू सहित स्थानीय सांसद एवं विधायक के प्रतिनिधि भी मौजूद थे।

छोटे और सीमांत किसानों को लाभ पहुंचाना लक्ष्य
धान अभिप्राप्ति योजना का शुभारंभ करते हुए मंत्री डॉ. रामेश्वर उरांव ने कहा कि छोटे और सीमांत किसानों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से राज्य सरकार की ओर से 200 क्विंटल उपज पैदा करने वाले किसानों के धान अधिप्राप्ति की शुरुआत की गयी है। उन्होंने कहा कि देश में कृषि के संबंध में यह कहावत दशकों से प्रचलित है कि भारत में कृषि मानसून के साथ जुआ है। वर्षा होगी तो फसल होगी और वर्षा नहीं हुई, तो अच्छी फसल भी नहीं होगी। इसका एकमात्र रास्ता यही है कि देश में सिंचित कृषि क्षेत्र में वृद्धि की जाए। अभी झारखंड में सिर्फ 28 फीसदी कृषि योग्य भूमि ही सिंचित है। 72 प्रतिशत भूमि में सिंचाई की सुविधा का अभाव है।

 

किसानों को कर्ज में फंसने नहीं देगी हेमंत सरकार
वित्त मंत्री ने कहा कि कॉपरेटिव आंदोलन भी देश में असफल रहा है। इसे ठीक करने की जरूरत है। डॉ. रामेश्वर उरांव ने कहा कि यह भी किवंदतियां है कि देश के किसान कर्ज में जन्म लेते है, कर्ज में जीते है और कर्ज में ही मर जाते हैं, लेकिन झारखंड सरकार किसानों के कर्ज में मरने की बात तो दूर, उन्हें कर्ज में फंसने भी नहीं देगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के मार्गदर्शन में तत्कालीन वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने देश में कर्जमाफी की शुरुआत की थी और झारखंड सरकार ने भी तमाम परेशानियों और प्रतिकुल वित्तीय स्थिति के बावजूद किसानों का 50 हजार रुपये का कर्ज माफ किया है। अधिकांश किसानों को कर्ज माफी का लाभ मिल चुका है। प्रक्रिया पूरी होने के बाद अन्य सभी किसानों को भी 50 हजार रुपये के ऊपर के कर्ज माफी का काम प्रारंभ किया जाएगा।

देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है खेती और किसानी
वित्त मंत्री ने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ कृषि है। यही कारण है कि वर्ष 2008 में जब दुनिया भर में आर्थिक मंदी आई तो कई विकसित देशों की अर्थव्यवस्था हिल गयी लेकिन, तब प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व में किसानों की बदौलत देश की अर्थव्यवस्था पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस हमेशा से किसानों के साथ खड़ी रही है, जबकि भाजपा का साथ पूंजीपतियों को मिलता रहा है।

उन्होंने बताया कि देश में हरित क्रांति के बाद यह बात सामने आयी कि किसानों को उनकी उपज का उचित कीमत नहीं मिल पा रहा है, जिसके कारण देश में न्यूनतम समर्थन मूल्य की शुरुआत की गयी, भाजपा एमएसपी को समाप्त करना चाहती है, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कह रहे है कि 2022 तक किसानों की आय दोगुनी हो जाएगी,लेकिन यह संभव नहीं होता नहीं दिख रहा है।

व्यापारियों को नहीं मिल पायेगा योजना का लाभ
डॉ. उरांव ने कहा कि राज्य सरकार ने किसानों से 200 क्विंटल तक धान न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदने का निर्णय लिया है, इससे छोटे और मध्यम किसानों को लाभ मिलेगा, लेकिन कोई किसान यह प्रमाणित करता है उसने 1000 क्विंटल धान उपज किया है तो उसे भी लाभ मिलेगा। इस योजना का लाभ व्यापारियों को नहीं दिया जाएगा।

कृषि मंत्री ने पूर्ववर्ती रघुवर सरकार को लताड़ा
कृषि मंत्री बादल ने कहा कि पिछली सरकार के अंतिम 2 वर्षां के कार्यकाल को देखा जाए,तो वर्ष 2017-18 में 40 लाख मीट्रिक टन धान खरीद के लक्ष्य विपरीत 21 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद हुई, वर्ष 2018-19 मेंभी 40 लाख मीट्रिक टन के विपरीत सिर्फ 22 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद हुई, जबकि हेमंत सरकार में कोरोना काल में सभी विपरीत परिस्थितियों के बावजूद 38लाख मीट्रिक टन की खरीद हुई।


2020-21 में भी 60 लाख टन मीट्रिक टन लक्ष्य के विरूद्ध 62 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद हुई। उन्होंने कहा कि इस बार राज्य खाद्य निगम द्वारा धान खरीद की मॉनिटरिंग की जा रही है। साथ ही यार्ड बनाने और अंतिम व्यक्ति तक इसका लाभ पहुंचाने की कोशिश होगी।