द फॉलोअप टीम, बेंगलुरु:
टैलेंट अमीरी-गरीबी की मोहताज नहीं होती है। वह तो किसी के पास भी चली जाती है, चाहे वो अंग्रेजी मीडियम में पढ़ने वाले घर के बच्चे हों या किसी सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले विद्यार्थी। जी हां ऐसे ही कुछ टैलेंटेड बच्चे देखे गए हैं कर्नाटक के मल्लेश्वरम (बेंगलुरू) के मट्टीकेरे मॉडल प्राइमरी स्कूल में। उपग्रह लॉन्च करने वाला देश का पहला स्कूल बनने जा रहा है। राज्य के उपमुख्यमंत्री सी एन अश्वथ नारायण ने एक कार्यक्रम में स्कूल में लैपटॉप बांटने के दौरान यह बताया। उन्होंने बताया कि आमतौर पर ऐसे प्रोजेक्ट में इंजीनियरिंग केे छात्र भाग लेते हैं। लेकिन पहली बार सरकारी स्कूल के बच्चे इंडियन टेक्लोलॉजिकल कांग्रेस एसोसिएशन और इसरो की मदद से इस प्रोजेक्ट में शामिल होने जा रहे हैं।
स्कूल में होगी सेटेलाइट डिजाइन
सैटेलाइट की डिजाइनिंग स्कूल में ही की जायेगी। जिसमें यहां के बच्चे सीधे तौर पर जुड़ेंगे। अश्वथ नारायण ने बताया कि मल्लेश्वरम अगले साल होने वाले 75वें स्वतंत्रता दिवस समारोह में 75 उपग्रहों को लॉन्च करने के कार्यक्रम में शामिल होगा। उन्होंने कहा कि कोरोनाकाल में भी राज्य के सरकारी स्कूलों में नामांकन बढे हैं। मल्लेश्वरम के सरकारी स्कूलों में 500 बच्चे बढ़े हैं। यह आकड़ा 2,221 से बढ़कर 2,743 हो गया हैं। इसीलिए यहां के सरकारी स्कूल को प्रोग्राम में शामिल होने के लिए चुना गया है।
मंदिरों का क्षेत्र है मल्लेश्वरम
मल्लेश्वरम उपमुख्यमंत्री सी एन अश्वथा नारायण का विधानसभा क्षेत्र भी है। यह इलाका मंदिरों के लिए फेमस है। जिस स्कूल को चुना गया है, उसका संचालन शेषाद्रिपुरम एजुकेशन ट्रस्ट करता है। यह बेंगलुरू के 18वें क्रॉस पर स्टोन बिल्डिंग कॉलेज में स्थित है। अच्छी बात यह है कि इसरो अब तक छात्रों के 6 सैटेलाइट लॉन्च कर चुका है। नासा ने दो सैटेलाइट लॉन्च किए हैं। पहली बार सरकारी स्कूल के बच्चे सैटेलाइट लॉन्च से जुड़ रहा है। चेन्नई की प्राइवेट एजुकेशन फर्म स्पेस किड्स इंडिया ने भी दो साल पहले कलामसैट-2 सैटेलाइट बनाया था। इसे छात्रों ने महज 12 लाख की लागत से 6 दिनों में बनाया था।