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JBVNL ने नहीं किया DVC को भुगतान, झारखंड के इन जिलों में काटी जा रही है बिजली

JBVNL ने नहीं किया DVC को भुगतान, झारखंड के इन जिलों में काटी जा रही है बिजली

द फॉलोअप टीम, रांची: 

डीवीसी ने झारखंड बिजली वितरण निगम को दिए गए अल्टीमेटम के मुताबिक कमांड एरिया में बिजली कटौती शुरू कर दी है। बिजली कटौती का सीधा असर राज्य के छह जिलों में हुआ है। रामगढ़, हजारीबागक कोडरमा, बोकारो, धनबाद और गिरिडीह में बिजली उपभोक्ताओे को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यहां 8 घंटे तक बिजली काटी जा रही है। 

झारखंड में गहरा गया है बिजली संकट
झारखंड में बिजली का संकट गहरा गया है। कई जिलों में 4 से लेकर 8 घंटे तक बिजली की कटौती की जा रही है। मिली जानकारी के मुताबिक शनिवार रात को धनबाद में कई किस्तों में 8 घंटे तक बिजली काटी गई। 120 की जगह महज 80 मेगावाट ही बिजली की आपूर्ति की गई। इस वजह से शहर के अधिकांश इलाकों में घंटो तक बिजली गुल रही है। बोकारो के शहरी इलाकों में तो तकरीबन 16 घंटे तक बिजली की कटौती की गई। लोगों को काफी हलकान होना पड़ा। 

ग्रामीण इलाकों में ज्यादा है बिजली कटौती
हालात ये हैं कि शहरी इलाकों की तुलना में ग्रामीण इलाकों में ज्यादा बिजली काटी जा रही है। चास, चंदनक्यारी, कसमार, पेटरवार, जरीडीह में तो 10 से 12 घंटे ही बिजली की आपूर्ति की जा रही है। गिरिडीह में बिजली कटौती का उतना असर नहीं दिखा। रामगढ़ में 4 घंटे तक लोड शेडिंग हुई। हजारीबाग में भी रविवार की सुबह 3 घंटे तक बिजली आपूर्ति ठफ रही, शाम को भी डेढ़ घंटे लोड शेडिंग की घटना हुई। इससे काफी परेशानी हुई। 

डीवीसी की कटौती का मार ज्यादा नहीं
गौरतलब है कि ग्रिड सब-स्टेशन शुरू होने के बाद से जेबीएनएल का कई हिस्सों में अपना नेटवर्क हो गया है, इसलिए डीवीसी की कटौती की मार का उतना असर नहीं हो रहा। धनबाद में गोविंदपुर ग्रिड, चतरा औऱ हजारीबाग में इटखोरी ग्रिड, जबकि गिरिडीह में सरिया जमुआ संचरण लाइन चार्ज होने पर उपभोगताओं को जेबीवीएनएल नेटवर्क के जरिये बिजली दी जा रही है। हालांकि त्योहारी सीजन में बिजली काटी जा रही है। ये काफी मुश्किल है। 

300 मेगावाट बिजली की कटौती जारी रहेगी
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जेबीवीएनएल डीवीसी से तकरीबन 600 मेगावाट बिजली खरीद कर आपूर्ति करता है। डीवीसी के अल्टीमेटम के मुताबिक 31 अक्टूबर तक 2 हजार 110 करोड़ रुपये जेबीवीएनएल पर बकाया है। समझौते की शर्तों के मुताबिक जब तक बकाया का भुगतान नहीं किया जाता, 50 फीसदी यानी 300 मेगावाट बिजली की कटौती की जायेगी। फिलहाल जेबीवीएनएल प्रबंधन डीवीसी प्रबंधन से वार्ता करने में जुटा है।