द फॉलोअप टीम, रांची:
देश-दुनिया को झारखंड के क्रांतिकारियों और पुरातात्विक स्थलों से परिचित कराने वाले आदि पत्रकार और शिक्षाविद् डॉ भुवनेश्वर अनुज की सांसों ने आखिर दामन छोड़ दिया। पत्रकार संजय कृष्ण ने बताया कि गुरुवार को उनको ब्रेन स्ट्रोक हुआ था। सेवा सदन में भर्ती थे, लेकिन शुक्रवार को करीब दो बजे दिन में 85 साल की उम्र में निधन हो गया। जनजातीय भाषा विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ गिरिधारी राम गौंझू कहते हैं, उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा काम किया। अपने ढंग की उन्होंने पत्रकारिता की और यहां के क्रांतिकारियों को सामने लाए। अनुजजी को झारखंड रत्न मिल चुका था और वे लोक सेवा समिति के केंद्रीय सलाहकार भी थे। समिति के अध्यक्ष नौशाद खान ने उनके निधन को बड़ी क्षति बताया है।
मुख्यमंत्री ने भी जताया शोक
मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने भी प्रख्यात शिक्षाविद, साहित्यकार, पत्रकार और झारखंड आंदोलन के प्रणेता डॉ भुवनेश्वर अनुज के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है । मुख्यमंत्री ने अपने शोक संदेश में कहा कि श्री अनुज ने शिक्षा, साहित्य और पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई थी । झारखंड आंदोलन में उनके अहम योगदान को कभी भुला नहीं सकते हैं। उनके निधन से जो जगह खाली हुई है, उसकी भरपाई नहीं हो सकती है ।मुख्यमंत्री ने ईश्वर से शोक की इस घड़ी में उनके परिजनों को दुख सहने की शक्ति देने की कामना की।
कई किताबें प्रकाशित
डॉ अनुज ने अपने जीवन की यात्रा लेखन से शुरू की थी। छोटानागपुर संदेश का संपादक रहते हुए झारखंड की सभी नौ भाषाओं के साहित्य, संस्कृति, कला, परंपरा और इतिहास को प्रमुखता से उजागर किया। इसके बाद स्वतंत्र रूप से उन्होंने नागपुरी लोक साहित्य, अतीत के दर्पण में झारखंड, छोटानागपुर के प्राचीन स्मारक, झारखंड के शहीद, सीतक बूंद, नागपुरी और उसका लोकमानस, नागपुरी लोककथा साहित्य, नागपुरी पद्य लोक साहित्य, नागपुरी गद्य लोक साहित्य आदि पुस्तकें लिखकर एक बड़ी कमी की पूर्ति की। अनुजजी का जन्म 12 अक्टूबर 1936 को सिसई में हुुआ था। अपने गांव में कार्तिक उरांव के नाम पर हाई स्कूल की स्थापना की। वे कार्तिक बाबू को अपना आदर्श मानते थे। राज्य में नागपुरी व अन्य झारखंडी भाषाओं में पढ़ाई आरंभ कराने वाले में वे प्रमुख थे। संजय गांधी मेमोरियल कालेज, पंडरा, रांची, सिसई कालेज, बसिया कालेज, लापुंग कालेज खोलकर शिक्षा के प्रति लोगों को जागरूक किया।
खोले कई स्कूल और कॉलेज भी
कवयित्री और झारखंडी भाषा साहित्य संस्कृति अखड़ा की महासचिव वंदना टेटे ने बताया कि वो नागपुरी-झारखंडी साहित्य के पुरोधा थे। डॉ. भुवनेश्वर अनुज जाने-माने भाषाविद, नागपुरी लोक साहित्य के अध्येता व संग्राहक, अनेक पुस्तकों के रचयिता, कई पत्र-पत्रिकाओं के संपादक-प्रकाशक और एक शिक्षाविद थे। उन्होंने नागपुरी भाषा-साहित्य के उन्नयन के लिए जीवनभर प्रयास किया। स्कूल-कालेज खोलने के अलावा कई किताबें लिखीं हीं, साथ कई पुस्तकों का संपादन भी किया है। जिसमें मुख्य हैं- दुई डाइर बीस फूल, एक झोपा नागपुरी फूल, खुखड़ी रूगड़ा आदि। अनेक पुरस्कारों से सम्मानित डॉ. अनुज के निधन से हमने एक सांस्कृतिक योद्धा खो दिया जिनकी जगह कोई नहीं ले सकता।