द फॉलोअप टीम, रांची:
चाकुलिया के रहने वाले चंद्रमोहन किस्कू को साहित्य अकादमी पुरस्कार से नवाजा जायेगा। चंद्रमोहन संताली लेखक हैं। चंद्रमोहन किस्कू ने महाश्वेता देवी की बांग्ला उपन्यास ‘सिदो कान्हूर डाके’ का संताली अनुवाद ‘सिद्धू कान्हू तिगिनाग होहोते पुस्तक के रूप में किया। इसके लिए उन्हें वर्ष 2020 का अनुवाद पुरस्कार देने की घोषणा की गई। चंद्रमोहन फिलहाल चाकुलिया रेलवे स्टेशन पर टेलीकॉम मेंटेनेंस विभाग में कार्यरत हैं। यह पुरस्कार पाकर चंद्रमोहन का पूरा परिवार काफी खुश है।

बचपन से ही साहित्य में रुचि
चंद्रमोहन ने बताया कि उनके नाना दमन हांसदा भी लेखक थे। उनकी अपनी पुस्तकालय थी। इसी कारण बचपन से ही उनकी साहित्य के प्रति रुचि रही। इंटर की पढ़ाई घाटशिला कॉलेज से पूरी करने के बाद टाटा टेल्को से इन्होंने अप्रेंटिस किया। वर्ष 2005 में चंद्र मोहन को नौकरी मिल गई। बचपन की पढ़ाई चाकुलिया प्रखंड अंतर्गत बड़ी कानपुर स्कूल में हुई। यहीं उनका ननिहाल है।

ये है चंद्रमोहन की किताबें
चंद्रमोहन किस्कू ने कई पुस्तकें लिखी हैं जिनमें से उनकी हिंदी में प्रकाशित पुस्तकें हैं - (1) सबरनाखा (2) फूलों की खेती (3) एक आदिवासी लड़की (4) महुआ चुनती आदिवासी लड़की (5) प्रेम के गीत (सभी कविता संग्रह) (6) उसके जाने के बाद (संताली से हिंदी अनुवाद मूल कवि श्याम सी टुडू) (7) मुर्गा पाड़ा तथा अन्य कविताएं ( संताली से हिंदी अनुवाद मूल कवि आनपा मार्डी ) और संताली में- (1)मुलूज लाँदा ( कविता संग्रह ) (2) फेसबुक (कहानी संग्रह ) (3)आंगरा (मूल हिंदी कविता संग्रह आंगोर का संताली अनुवाद) (4) सिदू कान्हू तिकिनाग होहोते (मूल बांग्ला उपन्यास सिदू कान्हुर डाके का संताली अनुवाद) (5)बिर बुरु रेयाग आईदारी ( मूल बांग्ला उपन्यास अरोन्येर अधिकार का संताली अनुवाद) (6) काहू को आर कालापानी (मूल हिंदी कहानी संग्रह कव्वे और कालापानी का संताली अनुवाद।