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सितारे दिलाएंगे सियासत का ताज! चुनाव से पहले बंगाली एक्टर्स क्यों रहे हैं पॉलिटिक्स में एंट्री

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द फॉलोअप टीम, कोलकाता: 
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की तारीखों का एलान कर दिया गया है। इस बीच पश्चिम बंगाल की सियासी फिजा में सितारों की महक कुछ ज्यादा ही तैर रही है। ऐसा लगने लगा है जैसे तृणमूल और भारतीय जनता पार्टी जैसे बड़े राजनीतिक दलों की नैया सितारों के भरोसे पार लगने वाली है। जितनी आकस्मिक और व्यापक तरीके से टॉलीवुड सितारों ने विधानसभा चुनाव के लिए कैंपेनिंग के दौरान बीजेपी या फिर तृणमूल कांग्रेस का दामन थामा है वो काफी हैरान करने वाला है। 

इन बांग्ला एक्टर्स ने थाम लिया पार्टी का दामन
गुरुवार को फिल्म अभिनेता और निर्देशक धीरज पंडित, अभिनेत्री सुभद्रा मुखर्जी और पहले बीजेपी में रही उषा चौधरी ने तृणमूल कांग्रेस का दामन थाम लिया। दूसरी तरफ कोलकाता में गायिका अदिति मुंशी ने पार्टी सांसद सौगत राय की मौजूदगी में तृणमूल कांग्रेस का दामन थाम लिया। जानकारी के मुताबिक अदिति मुंशी के पति उत्तरी 24 परगना जिले में तृणमूल युवा कांग्रेस के अध्यक्ष हैं। ये पहली बार नहीं है जब मनोरंजन जगत से जुड़े सितारों ने राजनीतिक पार्टी का दामन थामा हो। 

सायंतिका बनर्जी ने थामा टीएमसी का दामन
बीते तीन मार्च को टॉलीवुड अभिनेत्री सायन्तिका बनर्जी ने कोलकाता स्थित टीएमसी भवन में तृणमूल कांग्रेस का दामन थाम लिया था। उनका पार्टी में शामिल होना कितना अहम है इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि सायन्तिका बनर्जी तृणमूल कांग्रेस के महासचिव पार्थ चटर्जी, मंत्री सुब्रत चटर्जी और ब्रात्य बसु की मौजदूगी में तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गयीं। 

बीजेपी में शामिल हो गयीं एक्ट्रेस श्रावंती चटर्जी
ऐसा नहीं है कि केवल तृणमूल कांग्रेस में ही टॉलीवुड सितारों ने रूचि दिखाई हो। भारतीय जनता पार्टी भी सितारों का ठिकाना बनी है। बीते सोमवार को बांग्ला फिल्मों की मशहूर अभिनेत्री श्रावंती चटर्जी ने बीजेपी का दामन थाम लिया था। श्रावंती चटर्जी के बीजेपी में शामिल होने के वक्त बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय, बंगाल में बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष सहित कई अन्य वरिष्ठ नेता मौजूद थे। 
श्रावंती चटर्जी से पहले लोकप्रिय टॉलीवुड अभिनेत्री पायल सरकार ने भी बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा की उपस्थिति में पार्टी का दामन थाम लिया था। श्रावंती चटर्जी ने कहा था कि मैं पीएम मोदी की उंगलियां थाम कर बंगाल का विकास करना चाहती हूं। श्रावंती चटर्जी ने कहा कि बंगाल को सोनार बांग्ला बनाना उनका लक्ष्य है। वहीं पायल सरकार ने कहा कि उन्हें पीएम की नीतियां पसंद हैं। 

अभिनेता यश दासगुप्ता ने थामा बीजेपी का हाथ
केवल अभिनेत्रियां ही नहीं बल्कि बांग्ला फिल्मों के अभिनेताओं ने भी सियासी पारी खेलने में रूचि दिखाई है। बीते 17 फरवरी को बांग्ला फिल्मों के जाने माने अभिनेता यश दासगुप्ता ने भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया। यश दासगुप्ता ने भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के नेतृत्व में बीजेपी का दामन थामा था। उन्होंने कहा था कि वे फिल्मों से इतर नयी पारी को लेकर उत्साहित हैं।
यश दासगुप्ता के साथ सौमिनी विश्वास, मल्लिका बंद्योपाध्याय, अशोक भद्र, मीनाक्षी घोष, पापिया अधिकारी और सौमिली घोष जैसे कई टॉलीवुड अभिनेता और अभिनेत्रियों ने बीजेपी का दामन थामा।

सितारों की लोकप्रियता को भुनाती है पार्टियां
सवाल है कि आखिर क्यों चुनाव के वक्त ही सितारों को समाजसेवा की याद आती है। क्यों वे चुनाव से ठीक पहले किसी ना किसी राजनीतिक पार्टी का दामन थाम लेते हैं। इसके पीछे की वजह आपको इनकी लोकप्रियता में मिलेगी। जानकारी के मुताबिक पश्चिम बंगाल में बांग्ला फिल्मों की धूम रहती है। वहां के आम लोगों में टॉलीवुड कलाकारों का काफी क्रेज रहता है। बीजेपी या तृणमूल में शामिल होने वाले अभिनेता और अभिनेत्रियों का सोशल मीडिया अकाउंट्स खंगाले तो फेसबुक, ट्विटर और इंस्टाग्राम पर इनके लाखों की संख्या में फॉलोवर हैं। 

सितारों के जरिये सियासत तक का सफर
इन सितारों का किसी भी पार्टी या विचारधारा के समर्थन में किया गया एक भी ट्विट या पोस्ट लाखों लोगों को एक साथ प्रभावित कर सकता है। यह वजह है कि राजनीतिक पार्टियां इनकी लोकप्रियता को भुनाने की कोशिश करती है। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव पहला नहीं है जहां सितारों को राजनीतिक पार्टियों का हिस्सा बनाया गया है। लोकसभा चुनाव के दौरान भी सभी पार्टियों विशेष तौर पर कांग्रेस और बीजेपी ने सितारों को चुनावी मैदान में उतारा। कोई कलाकार सीधे चुनाव लड़ा तो किसी ने किसी प्रत्याशी के पक्ष में वोट मांगा। सन्नी देओल, रविकिशन, दिनेश लाल यादव निरहुआ, पवन सिंह, सपना चौधरी और अमीषा पटेल जैसे कई नाम इस फेहरिश्त में शामिल हैं।

सितारों के सहारे सियासत तक के सफर का प्रयास कोई नई बात नहीं है। तमाम चुनावों में राजनीतिक पार्टियां ऐसा दांव चलती है। कामयाबी कितनी मिल पाती है ये जनता के मूड पर निर्भर करता है।