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गीता यानी घर से बिछड़ने की त्रासदी और वापस पाने की अंतहीन तलाश

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द फॉलोअप टीम, दिल्ली: 
पाकिस्तान से लौटी मूक बधिर युवती गीता को उसका परिवार मिल गया। गीता की असली मां महाराष्ट्र के नौगांव की रहने वाली है। गीता की मां का नाम राधा वाघमारे है। बीते पांच साल से जारी कोशिशों के बाद गीता ने फाइनली अपनी मां को पहचान लिया। राधा ही गीता की मां है इस बात की पुष्टि डीएनए टेस्ट से भी हो चुकी है। गीता फिलहाल नौगांव में अपने माता-पिता के साथ रहने लगी हैं। 
पाकिस्तादन के अखबार डॉन में छपी यह खबर भारत के मीडिया में दिनभर चलती रही। दिन ढलते बीबीसी ने भारत में गीता की निगरानी कर रही संस्थार के हवाले से इसका खंडन कर दिया। दिया। बीबीसी की खबर के मुताबिक गीता महाराष्ट्र के परभणी ज़िले में है। उनकी देखभाल 'पहल फ़ाउंडेशन' कर रही है। 'पहल फ़ाउंडेशन' के संस्थापक सदस्य और सलाहकार डॉ. अशोक सेलगांवकर ने कहा है कि डॉन में दी गई ख़बर ग़लत है।



पाकिस्तानी अखबार डॉन में छपी खबर
पाकिस्तानी अखबार डॉन ने पाकिस्तान में गीता को करीब 10 साल तक सहारा देने वाली बिलकिस ईधी के हवाले से लिखा कि गीता को फाइनली उसका परिवार मिल गया। गीता इस बात से काफी खुश है। बिलकिस ईधी पाकिस्तान की समाजसेवी संस्था ईधी वेलफेयर ट्रस्ट के फाउंडर अब्दुल सत्तार ईधी की पत्नी हैं। उन्होंने ही बताया कि वो लगातार गीता के संपर्क में थी। इसी सप्ताह गीता ने उन्हें बताया कि उसे उसका परिवार मिल गया है जो महाराष्ट्र के नौगांव में रहता है। 



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पाकिस्तान में बिलकिस ने पाला गीता को
बता दें कि गीता बचपन में गलती से सीमा पार करके पाकिस्तान चली गयी थीं। बिलकिस बताती हैं कि गीता उन्हें कराची रेलवे स्टेशन में मिली थी। उस समय गीता महज 12 या13 साल की थीं। बिलकिस उन्हें अपने ट्रस्ट के शेल्टर में ले गयीं। वहां उस बच्ची का नाम रखा गया फातिमा। बिलकिस कहती हैं कि मैंने पहले उसका नाम फातिमा रखा लेकिन जब मुझे पता चला कि वो हिंदू है तो मैंने उसका नाम गीता रख दिया। मैंने उसे वहां अपनी बच्ची की तरह पाला। साईन लैंग्वेज सीखी ताकि उससे बात कर सकूं। 



सुषमा स्वराज गीता को भारत लाईं थीं
साल 2015 में गीता दुनिया की नजरों में आईं। भारत की तात्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के प्रयासों से गीता को भारत लाया गया। गीता के परिजनों को तलाशने की कोशिश शुरू की गयी। कई परिवारों ने दावा किया कि गीता उनकी बेटी है लेकिन गीता ने किसी को भी नहीं पहचाना। गीता भारत सरकार के संरक्षण में रहती रही। अब पांच साल बाद फाइनली गीता को उसका परिवार मिल गया है। हालांकि, गीता के जैविक पिता की मौत कुछ साल पहले ही हो गयी। इसके बाद गीता की मां ने दूसरी शादी कर ली। गीता इस वक्त उन्हीं के साथ नौगांव में रहती है। 



गीता को याद कर भावुक होती हैं बिलकिस
बिलकिस कहती हैं कि गीता उनके लिये उनकी बेटी की तरह है। परिवार से दूर रहना किसी के लिये भी काफी मुश्किल होता है और गीता जैसी स्पेशल बच्ची के लिए तो ये और भी मुश्किल रहा होगा।