logo

ऑनलाइन शिक्षा व्यवस्था से 30 फीसदी बच्चों को ही फायदा, उसपर भी कभी सर्वर डाउन, तो कभी ट्राई एगेन की समस्या

ऑनलाइन शिक्षा व्यवस्था से 30 फीसदी बच्चों को ही फायदा, उसपर भी कभी सर्वर डाउन, तो कभी ट्राई एगेन की समस्या
द फॉलोअप टीम, चाईबासा  
लॉकडाउन के कारण  ऑनलाइन शिक्षा व्यवस्था बच्चों के लिए कारगर साबित नहीं हो रही है। इसका कारण सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले गरीब बच्चों के पास मोबाइल का नहीं होना व सुदूर ग्रामीण क्षेत्र में नेटवर्क की समस्या होना है। इसके कारण छात्रों और अभिभावकों में निराशा का भाव उत्पन्न हो गया है।

30 फीसदी बच्चे को मिल रहा है फायदा
हालांकि शिक्षक ऑनलाइन पाठ्य सामग्री उपलब्ध करा रहे हैं, लेकिन इसका कोई कारगर फायदा नहीं हो रहा है। यह  सफेद हाथी भी साबित हो रहा है। स्कूली छात्रों को ऑनलाइन डिजिटल क्लास का लाभ नहीं मिल रहा है। बीइइओ का कहना है कि सिर्फ 30 फीसदी बच्चे ही इसका फायदा उठा पा रहे हैं।

दो-तीन बच्चों पर एक स्मार्ट फोन 
बता दें कि नोवामुंडी के जैतंगढ़ में पिछले 6 माह से कोरोना संकट के कारण स्कूल बंद है, लेकिन फीस वसूली के लिए छात्रों को ऑनलाइन पठन-पाठन और परीक्षा ली जा रही है। इसके लाभ मात्र 30 फीसदी बच्चों को मिल रहा है। एक ही समय में परीक्षा की टाइमिंग होने से कई छात्र परीक्षा देने से वंचित हो जा रहे हैं। कई अभिभावक के दो-तीन बच्चे स्कूल में पढ़ते हैं। उनके पास स्मार्ट फोन एक ही है।

कभी सर्वर डाउन तो कभी ट्राई एगेन की समस्या
उल्लेखनीय है कि सुबह 9 बजे से साढ़े दस तक ऑब्जेक्टिव, फिर 11 बजे से 12:30 बजे तक सब्जेक्टिव परीक्षा हो रही है। नर्सरी सेक्शन में 4 से 6 बजे तक परीक्षा हो रही है। अभिभावक रेखा देवी ने कहा कि सुबह की परीक्षा में नेट पैक खत्म हो जा रहा है। वहीं ट्राई अगेन की समस्या है। सर्वर डाउन रहता है। कुल मिलाकर बच्चों के लिए ऑनलाइन परीक्षा और पठन-पाठन सिर दर्द बन गया है। पब्लिक स्कूल फीस के लिए बच्चों को सुबह से शाम तक टास्क दे देते हैं। बच्चों को 6 से 8 घंटे मोबाइल से चिपके रहना पड़ता है। फिर होम वर्क करने को 3 से 4 घंटे चाहिए। बताया गया कि ओवरलोड के कारण डिप्रेशन में जा रहे हैं, वहीं सरकारी स्तर पर कोई सहायता नहीं मिलने से अभिभावकों में नाराजगी है।