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जींस की छोटी जेब क्यों होती है? सालों पुरानी इस कहानी को जानकर रह जाएंगे हैरान

जींस की छोटी जेब क्यों होती है? सालों पुरानी इस कहानी को जानकर रह जाएंगे हैरान

द फॉलोअप डेस्क:
जींस पहनते समय आपने उसकी आगे वाली बड़ी जेब के अंदर बनी छोटी सी जेब जरूर देखी होगी। आकार में इतनी छोटी कि इसमें मोबाइल तो दूर, हाथ भी ठीक से नहीं जाता। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर जींस में इस जेब को बनाया ही क्यों गया था? दरअसल, यह छोटी सी जेब किसी फैशन ट्रेंड का हिस्सा नहीं, बल्कि करीब 150 साल पुरानी जरूरत से जुड़ी है। इसकी शुरुआत साल 1873 में हुई, जब Levi Strauss और Jacob Davis ने मजबूत कीलों वाली डेनिम पैंट के लिए पेटेंट हासिल किया था। उस दौर में जींस मुख्य रूप से मेहनत करने वाले लोगों के काम आने वाले कपड़ों में शामिल थी। मजदूरों और दूसरे कामगारों के लिए इसे मजबूत बनाया जाता था, ताकि काम के दौरान जेबें आसानी से न फटें। जींस की इसी छोटी जेब को शुरुआत में ‘वॉच पॉकेट’ कहा जाता था, क्योंकि उस समय लोग समय देखने के लिए पॉकेट वॉच यानी चेन वाली छोटी घड़ी का इस्तेमाल करते थे। इस घड़ी को सुरक्षित रखने के लिए जींस में अलग से छोटी जेब बनाई गई थी।


पॉकेट वॉच से सिक्कों तक, कैसे बदला छोटी जेब का इस्तेमाल? 

जींस की छोटी जेब का इस्तेमाल समय के साथ बदलता गया। शुरुआत में इसका मुख्य काम पॉकेट वॉच को सुरक्षित रखना था, लेकिन जैसे-जैसे घड़ी का चलन कम हुआ, लोग इसमें सिक्के, टिकट और दूसरी छोटी चीजें रखने लगे। इसी वजह से इसे बाद में कॉइन पॉकेट यानी सिक्के वाली जेब भी कहा जाने लगा। जींस की इस छोटी जेब से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा दूसरे विश्व युद्ध के समय का भी है। युद्ध के दौरान धातु की बचत के लिए Levi’s की जींस से छोटी जेब पर लगे कील कुछ समय के लिए हटा दिए गए थे। उस दौर में कपड़ों के निर्माण में इस्तेमाल होने वाली धातु को बचाने के लिए कई बदलाव किए गए थे। युद्ध खत्म होने के बाद साल 1947 में जींस के नए संस्करण में छोटी जेब के कील फिर से लगा दिए गए। यानी जींस की यह छोटी सी जेब समय के साथ कई बदलावों से गुजरी, लेकिन इसका अस्तित्व बना रहा।

आज भी जींस में क्यों बनी हुई है यह छोटी जेब? 

अब सवाल है कि जब पॉकेट वॉच का चलन लगभग खत्म हो चुका है, तो जींस में यह छोटी जेब आज भी क्यों मौजूद है? इसकी एक वजह यह है कि समय के साथ यह जींस के पारंपरिक डिजाइन का अहम हिस्सा बन गई। जींस की फिटिंग, रंग और डिजाइन में कई बदलाव हुए। कभी स्किनी जींस का चलन आया, तो कभी ढीली और हाई-वेस्ट जींस फैशन में रही, लेकिन छोटी जेब अपनी जगह बनी रही। Levi Strauss & Co. के इतिहास के मुताबिक, साल 1873 में बनी शुरुआती जींस में भी यह जेब मौजूद थी। हालांकि, उस समय जींस में आज की तरह दो पीछे वाली जेबें नहीं थीं। दूसरी पीछे वाली जेब साल 1901 में जोड़ी गई थी। इस तरह आज जींस में दिखने वाली छोटी जेब सिर्फ सिक्के रखने की जगह नहीं, बल्कि डेनिम के इतिहास की निशानी भी है। अगली बार जब आप जींस पहनें और इस छोटी सी जेब पर नजर पड़े, तो याद रखिएगा कि कभी इसे फैशन के लिए नहीं, बल्कि पॉकेट वॉच को सुरक्षित रखने के लिए बनाया गया था।

 

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