द फॉलोअप डेस्क, रांचीः
नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय कृषि विज्ञान परिसर (NASC), पूसा में 28-29 सितंबर को आयोजित दो दिवसीय ‘राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन-रबी अभियान 2026’ में झारखंड की कृषि, किसान हित और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े मुद्दे उठाए गए। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में आयोजित सम्मेलन में झारखंड की कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने राज्य की प्राथमिकताएं और सुझाव साझा किए। सम्मेलन में केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय, रबी फसलों की तैयारी, डिजिटल कृषि, किसान रजिस्ट्री, दलहन-तिलहन, उर्वरक उपलब्धता और कृषि विकास से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई।

Farmer ID से लेकर राइस फॉलो क्षेत्र तक विशेष सहयोग की मांग
शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि झारखंड की भौगोलिक, सामाजिक और कृषि परिस्थितियां अन्य राज्यों से अलग हैं। इसलिए केंद्र की कृषि योजनाओं को लागू करते समय राज्य की स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार आवश्यक लचीलापन और विशेष सहयोग दिया जाना चाहिए। उन्होंने AgriStack के तहत Farmer ID निर्माण का मुद्दा प्रमुखता से उठाते हुए कहा कि झारखंड में पुराने भूमि अभिलेखों और मौजूदा जमीनी स्थिति के बीच काफी अंतर है। राज्य में अंतिम व्यापक भूमि सर्वेक्षण वर्ष 1932 में हुआ था, जिससे भूमि अभिलेखों से जुड़ी व्यावहारिक कठिनाइयों के कारण Farmer ID निर्माण प्रभावित हो रहा है। उन्होंने केंद्र से झारखंड के लिए Farmer ID निर्माण में विशेष लचीलापन देने और बड़े पैमाने पर Farmer ID बनने तक इसे PM-KISAN सहित जरूरी कृषि योजनाओं के लाभ के लिए अनिवार्य पूर्व-शर्त नहीं बनाने का आग्रह किया। मंत्री ने बताया कि राज्य में रबी मौसम में करीब 12 लाख हेक्टेयर राइस फॉलो क्षेत्र उपलब्ध है, जिसमें अनुमानित 5-6 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को दलहन, तिलहन और बागवानी फसलों में लाने की क्षमता है। इसके विकास के लिए उन्होंने विशेष वित्तीय और तकनीकी पैकेज की मांग की।

दलहन का क्षेत्र 3.73 लाख हेक्टेयर पहुंचा, 50 हजार हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र का प्रस्ताव
मंत्री ने झारखंड में दलहन उत्पादन की संभावनाओं को रखते हुए बताया कि खरीफ 2025-26 में दलहन का क्षेत्र करीब 2.80 लाख हेक्टेयर था, जो खरीफ 2026-27 में बढ़कर करीब 3.73 लाख हेक्टेयर हो गया है। उन्होंने देवघर और दुमका में विकसित करीब 1,000-1,000 हेक्टेयर के अरहर क्लस्टरों का उल्लेख करते हुए क्लस्टर आधारित खेती को और विस्तार देने की जरूरत बताई। तिलहन के क्षेत्र में राज्य के प्रयासों का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि झारखंड में तिलहन का कुल क्षेत्र करीब 5.17 लाख हेक्टेयर है, जिसमें सरसों की प्रमुख हिस्सेदारी है। उन्होंने राइस फॉलो क्षेत्रों में दलहन, तिलहन और बागवानी फसलों को बढ़ावा देने के लिए आगामी रबी सीजन में 50 हजार हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र विकसित करने का प्रस्ताव रखा। सम्मेलन में दलहन में आत्मनिर्भरता, खाद्य तेल मिशन और फसल विविधीकरण जैसे विषय भी चर्चा के प्रमुख हिस्से रहे।
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KCC कवरेज बढ़ाने और कृषि यंत्रीकरण में 90% सहायता की मांग
मंत्री शिल्पी ने झारखंड में किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) की कम कवरेज का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2025-26 में निर्धारित लक्ष्य की तुलना में KCC कवरेज अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पाया है। उन्होंने बैंकों के माध्यम से सभी पात्र किसानों की पहचान कर उन्हें KCC से जोड़ने के लिए समयबद्ध saturation drive चलाने और किसानों की संस्थागत कृषि ऋण तक पहुंच बढ़ाने का आग्रह किया। कृषि यंत्रीकरण पर उन्होंने कहा कि झारखंड में बड़ी संख्या में छोटे, सीमांत और आदिवासी किसान हैं और मशीनरी की लागत उनके लिए बड़ी चुनौती है। उन्होंने SMAM के तहत झारखंड जैसे राज्यों में कृषि यंत्रों पर सब्सिडी को पात्र इकाई लागत के 90 प्रतिशत तक बढ़ाने पर विचार करने का आग्रह किया। साथ ही रांची के पलांडू फार्म रिसर्च सेंटर को बागवानी और आदिवासी कृषि प्रणालियों पर राष्ट्रीय स्तर के शोध केंद्र के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने इसे ‘National Institute for Horticulture and Tribal Farming Research’ के रूप में विकसित करने के लिए आधारभूत संरचना, शोध सुविधाओं और मानव संसाधन उपलब्ध कराने में केंद्र से सहयोग मांगा।
केंद्र-राज्य मिलकर झारखंड की कृषि को आगे बढ़ाएं
शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि झारखंड की कृषि को केवल उत्पादन तक सीमित रखने के बजाय इसे किसान आय, फसल विविधीकरण, तकनीक, प्रसंस्करण, बाजार और स्थानीय संसाधनों से जोड़कर समग्र कृषि अर्थव्यवस्था के रूप में विकसित करना होगा। उन्होंने कहा कि राज्य की विशिष्ट कृषि परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए केंद्र और राज्य के समन्वित प्रयासों से किसानों की आय बढ़ाने, कृषि को अधिक टिकाऊ बनाने और राज्य को कृषि क्षेत्र में आगे बढ़ाने की दिशा में ठोस परिणाम हासिल किए जा सकते हैं। मंत्री ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को झारखंड आने का निमंत्रण भी दिया, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया। शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि झारखंड की कृषि को अग्रणी पंक्ति में खड़ा करने के लिए केंद्र और राज्य सरकार को मिलकर काम करना होगा। सम्मेलन में राज्यों के कृषि मंत्री, केंद्र एवं राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी, कृषि वैज्ञानिक, ICAR के प्रतिनिधि और कृषि क्षेत्र से जुड़े अन्य हितधारक शामिल हुए।