द फॉलोअप डेस्क
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच ओमान और ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को लेकर अहम कूटनीतिक पहल की है। दोनों देशों के विदेश मंत्रालयों के उप-मंत्रियों के स्तर पर उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें इस रणनीतिक समुद्री मार्ग में सुचारू आवागमन बनाए रखने के उपायों पर विस्तार से चर्चा हुई। यह बैठक ऐसे समय में हुई है, जब क्षेत्रीय अस्थिरता के कारण वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर खतरे के संकेत मिल रहे हैं। दोनों देशों ने इस संवेदनशील स्थिति में संवाद को प्राथमिकता देते हुए संभावित समाधान तलाशने पर जोर दिया।
4 अप्रैल 2026 को हुई इस बैठक में दोनों देशों के विशेषज्ञ भी शामिल हुए। ओमान विदेश मंत्रालय के अनुसार, चर्चा का मुख्य केंद्र होर्मुज स्ट्रेट में ट्रांजिट को सुरक्षित और निर्बाध बनाए रखने के विकल्प थे। विशेषज्ञों ने कई व्यावहारिक प्रस्ताव और रणनीतिक दृष्टिकोण प्रस्तुत किए, जिनका आगे अध्ययन किया जाएगा। इस दौरान यह भी संकेत मिला कि दोनों देश ट्रांसिट को मॉनिटर और मैनेज करने के लिए एक व्यवस्थित प्रोटोकॉल तैयार करने की दिशा में काम कर रहे हैं।

ट्रंप की चेतावनी से बढ़ा दबाव
इस पूरे घटनाक्रम के बीच डोनाल्ड ट्रंप का सख्त रुख सामने आया है। ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी है कि यदि होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह नहीं खोला गया, तो अमेरिका कड़ी कार्रवाई करेगा।
सोशल मीडिया पर जारी अपने बयान में ट्रंप ने कहा कि पहले दिए गए 10 दिन के समय में अब बहुत कम समय बचा है और अगर ईरान ने समयसीमा का पालन नहीं किया, तो परिणाम “भयंकर” हो सकते हैं।

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर की आशंका
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण शिपिंग मार्गों में से एक है, जहां से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का परिवहन होता है। इस क्षेत्र में किसी भी तरह की बाधा का सीधा असर वैश्विक तेल कीमतों और अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
ओमान और ईरान की यह बैठक क्षेत्रीय स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है, लेकिन ट्रंप की धमकियों के बीच स्थिति अभी भी बेहद संवेदनशील बनी हुई है।
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