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ऑपरेशन सिंदूर से प्रभावित 22 बच्चों की शिक्षा का खर्च देंगे राहुल गांधी, पाक गोलीबारी का शिकार हुआ है परिवार 

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द फॉलोअप डेस्क 

विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भारत-पाकिस्तान संघर्ष के दौरान अपने माता-पिता या परिजनों को खोने वाले जम्मू-कश्मीर के 22 बच्चों की देखभाल का बीड़ा उठाया है। ये बच्चे अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए आतंकी हमले और उसके बाद हुई पाकिस्तानी गोलाबारी के शिकार हुए परिवारों से हैं।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, जम्मू-कश्मीर कांग्रेस अध्यक्ष तारिक हमीद करा ने बताया कि राहुल गांधी इन सभी बच्चों की शिक्षा और भरण-पोषण का पूरा खर्च उठाएंगे। ये वे बच्चे हैं जिन्होंने या तो अपने दोनों माता-पिता खो दिए हैं या फिर परिवार का एकमात्र कमाने वाला सदस्य अब उनके साथ नहीं है। करा ने बताया कि पहली वित्तीय सहायता बुधवार को जारी की जा रही है ताकि बच्चों की पढ़ाई में कोई रुकावट न आए। यह सहायता तब तक दी जाती रहेगी जब तक वे स्नातक स्तर की पढ़ाई पूरी नहीं कर लेते।


राहुल गांधी ने मई में पुंछ का दौरा किया था, जहां उन्होंने कांग्रेस कार्यकर्ताओं को प्रभावित बच्चों की सूची तैयार करने का निर्देश दिया था। इसके बाद स्थानीय सर्वे और सरकारी रिकॉर्ड से पुष्टि के बाद अंतिम सूची बनाई गई।
बच्चों से मुलाकात और हौसला बढ़ाया
राहुल गांधी ने पुंछ के क्राइस्ट पब्लिक स्कूल में पढ़ने वाले 12 वर्षीय जुड़वां बच्चों – उरबा फातिमा और जैन अली – से मुलाकात की, जो हमले में अपने परिजनों को खो चुके हैं। बच्चों से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा, “मैं तुम पर गर्व करता हूं। मुझे पता है तुम अपने दोस्तों को याद करते हो और अब डर भी लगता होगा, लेकिन याद रखो – पढ़ाई में मन लगाओ, दिल खोलकर खेलो और नए दोस्त बनाओ। यही तुम्हारा जवाब होना चाहिए।”


पुंछ सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र
22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने 7 मई को "ऑपरेशन सिंदूर" शुरू किया, जिसमें पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में आतंकी ठिकानों पर सर्जिकल हमले किए गए। इसके प्रतिशोध में पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर, विशेष रूप से पुंछ जिले में 8 से 10 मई तक भारी गोलीबारी की। इस हमले में 27 लोगों की जान गई और 70 से अधिक घायल हुए। पुंछ में वीहान भार्गव नाम के एक बच्चे की मौत तब हुई जब उसका परिवार शहर छोड़ने की कोशिश कर रहा था और उसे छर्रे लगे। धार्मिक स्कूल "जिया उल उलूम" पर भी हमला हुआ जिसमें कई बच्चे घायल हुए। इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अधिक प्रभावित होने वाला जिला पुंछ रहा, जहां सैकड़ों परिवारों को अपने घर छोड़कर राहत शिविरों में शरण लेनी पड़ी।

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