द फॉलोअप डेस्क
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राज्यसभा के लिए चार नए सदस्यों को मनोनीत किया है। इनमें 26/11 मुंबई हमलों सहित कई संवेदनशील मामलों में सरकारी वकील रहे उज्जवल निकम, प्रख्यात इतिहासकार और शिक्षाविद् मीनाक्षी जैन, केरल के वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता सी सदानंदन मास्टर और पूर्व विदेश सचिव एवं अनुभवी राजनयिक हर्षवर्धन श्रंगला के नाम शामिल हैं। यह नामांकन संविधान के अनुच्छेद 80(1)(a) और खंड (3) के तहत किया गया है, जो राष्ट्रपति को विशेष क्षेत्रों में योगदान देने वाले व्यक्तियों को राज्यसभा में मनोनीत करने का अधिकार देता है।

कैसे होते हैं राज्यसभा में नामांकन और क्या होते हैं अधिकार
राज्यसभा के मनोनीत सदस्य ऐसे व्यक्ति होते हैं जिन्होंने साहित्य, कला, विज्ञान, समाज सेवा या सार्वजनिक जीवन के अन्य क्षेत्रों में विशिष्ट योगदान दिया हो। ये सदस्य भी छह साल के लिए मनोनीत होते हैं और हर दो साल में एक-तिहाई सदस्य रिटायर होते हैं। संसद की सदस्यता लेने के बाद, मनोनीत सदस्य छह महीने के भीतर किसी राजनीतिक दल से जुड़ सकते हैं, अन्यथा वे स्वतंत्र माने जाते हैं।
संविधान के अनुच्छेद 249 के तहत, ये सदस्य राज्यसभा में उपस्थित होकर राष्ट्रीय महत्व के किसी राज्य विषय को संसद द्वारा कानून बनाए जाने के लिए प्रस्ताव पारित करने में भाग ले सकते हैं। अनुच्छेद 312 के अंतर्गत, नई अखिल भारतीय सेवाओं की स्थापना का अधिकार भी राज्यसभा को प्राप्त है, जिसमें मनोनीत सदस्य हिस्सा ले सकते हैं।

मिलती हैं समान सुविधाएं और सैलरी
मनोनीत सदस्यों को वे सभी वेतन, भत्ते और सुविधाएं मिलती हैं जो निर्वाचित राज्यसभा सांसदों को प्राप्त होती हैं। वर्तमान में उनका मासिक वेतन 1.24 लाख रुपये है। इसके अतिरिक्त वे कार्यालय व्यय, दैनिक भत्ता, आवास, यात्रा भत्ता, चिकित्सा सुविधा और पेंशन जैसे लाभों के हकदार होते हैं। रिटायरमेंट के बाद उन्हें 25,000 रुपये मासिक पेंशन मिलती है, जो पांच साल से अधिक सेवा पर 2,000 रुपये प्रतिवर्ष बढ़ जाती है।
