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पैडमैन तरुण ने दिल्ली में बच्चों के बेहतर बचपन पर रखी बात, सामाजिक भ्रांतियों को दूर करने को बताया आवश्यक

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द फॉलोअप डेस्क
5वें एमएचएम इंडिया समिट ( MHM India Summit 2025 ) का आयोजन शुक्रवार, 21 नवंबर को राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली स्थित होटल सांगरिला इरोस में हुआ। एमएचएम इंडिया समिट का आयोजन पद्मश्री साईं दामोदरम व प्रीति दामोदरम के नेतृत्व में त्रिचि तमिलनाडु की संस्था ग्रामालय के द्वारा किया गया। ग्रामालय को भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय के द्वारा की-रिसोर्स सेंटर के रूप में नामित किया गया है। 

एमएचएम इंडिया समिट में देश भर के विभिन्न राज्यों में माहवारी स्वच्छता व महिला सशक्तिकरण के मुद्दे पर योगदान दे रहे सैकड़ों सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता, माहवारी स्वच्छता प्रबंधन उत्पाद निर्माता, सीएसआर प्रोफेशनल व विभिन्न क्षेत्रों के जानकार हस्तियों ने मुख्य रूप से शिरकत की। सम्मेलन के दौरान माहवारी स्वच्छता व महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में देश भर में हो रहे प्रेरक कार्यों, अभियानों, संभावनाओं व चिंताओं पर विस्तार से वक्ताओं ने अपनी राय रखी। 5वें एमएचएम इंडिया समिट में झारखंड का प्रतिनिधित्व झारखंड के पैडमैन के नाम से मशहूर सामाजिक संस्था निश्चय फाउंडेशन के संस्थापक तरुण कुमार ने किया, उन्हें कार्यक्रम में बतौर स्पीकर आमंत्रित किया गया था।  
समुदाय और स्कूलों में बेहतर माहवारी स्वास्थ्य शिक्षा की रणनीतियों पर आधारित सत्र में बातचीत करते हुए तरुण ने सामुदायिक भागीदारी से लगातार जारी निश्चय अभियान के माध्यम से झारखंड के ग्रामीण इलाकों में कई जागरुकता प्रयासों के बारे में बताया, कहा कि किशोर होते बच्चे हार्मोनल बदलाव की प्रक्रिया से गुजरते है, उन्हें सही समय पर माहवारी स्वास्थ्य व जेंडर से जुड़े मुद्दों पर नियमित रूप से जानकारी व सहयोग मिलना चाहिए। यह समर्थन उनके जीवन व व्यक्तित्व को सकारात्मक दिशा देता है, जिसके अभाव में बच्चों का सामान्य मानसिक विकास प्रभावित होता है। ग्रामीण इलाकों के स्कूलों व समुदाय में संसाधनों का घोर अभाव व लाचारी देखी जाती है, जिससे किशोर व युवा होते बच्चों को लगातार जूझना पड़ता है। 

तरुण ने बताया कि प्रत्येक विद्यालय में बच्चियों के सहायता हेतु पैडबैंक व एमएचएम संसाधनों की समुचित व्यवस्था करने की यथाशीघ्र जरूरत है, वही माहवारी से जुड़े सामाजिक मिथकों व भ्रांतियों को दूर करने हेतु माहवारी स्वास्थ्य व पर्यावरण जागरूकता पर आधारित "एक पैड, एक पेड़" अभियान, वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर आधारित "पीरियड एंड साइंस", जेंडर समानता के सोच पर आधारित "मिक्स जेंडर क्रिकेट" व अन्य सामाजिक अभियानो की बड़े पैमाने पर पुनरावृत्ति सीमित संसाधनों में भी वैश्विक स्तर पर बड़ा बदलाव ला सकती है। 
समुदाय और स्कूलों में बेहतर माहवारी स्वास्थ्य शिक्षा की रणनीतियों पर आधारित सत्र का संचालन यूनिपैड इंडिया की गीता सोलंकी ने किया, वही ग्रीन पेंसिल फाउंडेशन के सैंडी खांडा, ह्यूमैनिफाई फाउंडेशन के नीरज गेरा, सुदीशा फाउंडेशन की निशा जायसवाल ने भी जुड़े सवालों पर अपनी प्रतिक्रिया दी, कार्यों के बारे में विस्तार से बताया। 

माहवारी स्वच्छता के संदेश को बढ़ावा देने हेतु लगभग आधे दर्जन बाइक राइडर्स का दल लगभग 5000 किलोमीटर की यात्रा कर त्रिचि, तमिलनाडु से नई दिल्ली पहुंचा था, जो कार्यक्रम में आकर्षण का केंद्र भी रहा। तरुण कुमार ने उनसे बातचीत करते हुए बताया कि अपनी मोटरसाइकिल के कारण ही हम जैसे सभी सामाजिक कार्यकर्ता न्यूनतम संसाधनों में भी दूर दराज के गांवों तक पहुंचकर जागरूकता प्रयास करने में सफल हो पाते है।


 

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