द फॉलोअप डेस्क
बिहार की राजनीति से शुरू हुआ एक हिजाब विवाद अब अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बनता जा रहा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के एक वायरल वीडियो पर अब सरहद पार पाकिस्तान से धमकी मिलनी शुरू हो गई है। जी हाँ, पाकिस्तान के एक डॉन ने नीतीश कुमार को लेकर धमकी दी है और उन्हें अंजाम भुगतने की चेतावनी दी है। 
शहजाद भट्टी द्वारा जारी वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. वीडियो में वह कहता है कि बिहार में एक बड़े पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा एक मुस्लिम महिला के साथ किया गया व्यवहार सभी ने देखा है. उसने आरोप लगाया कि इसके बाद उस पर बेवजह आरोप लगाए जा रहे हैं. भट्टी ने अपने वीडियो संदेश में कहा कि संबंधित व्यक्ति के पास अभी भी समय है कि वह उस महिला से माफी मांग लें, अन्यथा जिम्मेदार संस्थानों को इस पर कार्रवाई करनी चाहिए. उसने यह भी कहा कि "बाद में यह मत कहना कि चेतावनी नहीं दी गई थी." अब सवाल उठता है कि आखिर सरहद पार बैठे इस शख्स ने नीतीश कुमार को निशाना क्यों बनाया? .jpg)
क्या है पूरा मामला
दरअसल पूरा मामला ये है कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का एक वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गया है। वीडियो में हिजाब को लेकर हुई टिप्पणी ने पहले देश के भीतर सियासत गरमाई, लेकिन अब इसकी गूँज सात समंदर पार पाकिस्तान तक पहुँच गई है।
नीतीश कुमार का 'हिजाब वाला मामला' 15 दिसंबर 2025 को पटना में हुए एक सरकारी कार्यक्रम से जुड़ा है, जिसने अब एक बड़ा राजनीतिक और अंतरराष्ट्रीय विवाद खड़ा कर दिया है। पटना के 'संवाद' सचिवालय में आयुष चिकित्सकों को नियुक्ति पत्र बांटने का कार्यक्रम चल रहा था। जहां डॉ. नुसरत परवीन अपना नियुक्ति पत्र लेने मंच पर पहुंचीं, उन्होंने हिजाब पहना हुआ था। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उन्हें देखकर पूछा, "यह क्या है जी?" महिला कुछ कहती उससे पहले ही नीतीश कुमार ने अपने हाथों से महिला डॉक्टर का हिजाब खींचकर उनके चेहरे से नीचे कर दिया।.jpeg)
वीडियो में महिला डॉक्टर काफी असहज और घबराई हुई दिखीं। सोशल मीडिया पर यह वीडियो जैसे ही वायरल हुआ लोगों ने इसे एक महिला की गरिमा और धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन बताया। वहीं विपक्ष से राजद, कांग्रेस और AIMIM ने नीतीश कुमार पर तीखा हमला बोला। विपक्ष ने इसे "शर्मनाक" और "अमानवीय" बताते हुए मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग की। 
नीतीश कुमार के इस वीडियो ने न केवल राजनीतिक गलियारों में हलचल मचाई है, बल्कि जनता के बीच भी एक नई बहस को जन्म दे दिया है। जहाँ सत्ता पक्ष इसे गलत इरादा न होने की बात कह रहा है, वहीं सामाजिक संगठन इसे व्यक्तिगत अधिकारों का मुद्दा बता रहे हैं। लेकिन सरहद पार से आने वाली धमकियों ने इस मामले को और भी ज्यादा पेचीदा बना दिया है।