द फॉलोअप डेस्क, रांचीः
तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिन्ह को फ्रीज करने के चुनाव आयोग के फैसले के खिलाफ ममता बनर्जी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई के लिए मामला सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई है। यानी अब इस पूरे विवाद में अगली नजर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर है। दरअसल, चुनाव आयोग ने गुरुवार रात अंतरिम आदेश जारी करते हुए तृणमूल कांग्रेस के नाम और उसके पारंपरिक चुनाव चिन्ह ‘फूल और घास’ के इस्तेमाल पर रोक लगा दी थी। यह फैसला पार्टी के भीतर चल रहे गुटीय विवाद के बीच आया। आयोग ने दोनों गुटों को आगामी उपचुनाव के लिए अलग-अलग नाम और चुनाव चिन्ह दिए हैं।
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कपिल सिब्बल ने अदालत के सामने उठाए कड़े सवाल
इसके अगले दिन ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी और याचिका पर तत्काल सुनवाई की मांग की। सोमवार को वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने इस मामले का सुप्रीम कोर्ट के सामने उल्लेख किया। उन्होंने चुनाव आयोग की टाइमिंग पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब इस मामले पर जून से कार्यवाही चल रही थी और जुलाई में उनकी तरफ से जवाब भी दिया जा चुका था, तो चुनाव के बीच में नाम और चुनाव चिन्ह को फ्रीज क्यों किया गया।कपिल सिब्बल ने अदालत के सामने कहा कि चुनाव आयोग ने चुनाव की अधिसूचना जारी होने के बाद ही पार्टी के नाम और चिन्ह को फ्रीज किया है।

कब होगी ममता बनर्जी की याचिका सूचीबद्ध?
उन्होंने इस मामले को तत्काल सूचीबद्ध करने की मांग की। सुप्रीम कोर्ट की ओर से कहा गया कि सभी पक्षों को अपनी बात रखने का मौका मिलेगा। जब मामला सूचीबद्ध होगा, तब सभी पक्ष अपने तर्क रख सकेंगे। अदालत ने मामले को जल्द सूचीबद्ध करने का प्रयास करने की बात कही है।हालांकि, फिलहाल इस मामले की सुनवाई की सटीक तारीख और समय की जानकारी सामने नहीं आई है। ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि सुप्रीम कोर्ट में ममता बनर्जी की याचिका कब सूचीबद्ध होती है और सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलों पर अदालत क्या रुख अपनाती है। फिलहाल इतना साफ है कि तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर चुनाव आयोग का फैसला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है और मामले की अगली कार्रवाई अदालत में होगी।